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ममता की ‘वोटर लिस्ट’ वाली जंग को मिला रोहिणी आचार्य का साथ, बोलीं-  यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई

Lucknow Focus News Desk: पश्चिम बंगाल में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) विवाद में अब बिहार की राजनीति की भी एंट्री हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। रोहिणी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे संविधान और आम आदमी के मताधिकार को सुरक्षित रखने का संघर्ष बताया है।

‘ममता बनर्जी का संघर्ष हर मतदाता की लड़ाई’

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “SIR की प्रक्रिया में चुनाव आयोग जिस तरह की अनियमितताएं बरत रहा है, उसके खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई जम्हूरियत (लोकतंत्र) को महफूज रखने की लड़ाई है। वास्तव में, यह देश के हर उस नागरिक की लड़ाई है जिसे संविधान ने वोट देने का अधिकार दिया है।”

लालू-ममता की जोड़ी से प्रेरणा लेने की अपील

रोहिणी ने आगे कहा कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी संविधान को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, उसी तरह देश के हर युवा और नागरिक को आगे आना होगा। उन्होंने ममता बनर्जी के साहस और जुझारूपन की तारीफ करते हुए कहा कि वह इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी हैं।

मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर खुद ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई आने वाले सोमवार को तय की है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे विपक्षी खेमे में उम्मीद की किरण जगी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रोहिणी आचार्य का ममता बनर्जी के पक्ष में आना यह दर्शाता है कि 2026 के चुनावों से पहले विपक्षी दल ‘वोटर लिस्ट’ के मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं। अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद का भविष्य तय करेगी।

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