भारत-पाक तनाव का शेयर बाजार पर बड़ा असर, निवेशकों को पहले घंटे में 8.30 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

Lucknow Focus News Desk: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। बाजार खुलते ही भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को एक ही झटके में 8.30 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस गिरावट की मुख्य वजह भारत-पाक के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों को माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 8 मई को बाजार लाल निशान पर बंद हुआ था, लेकिन बाजार बंद होने के बाद यह खबर सामने आई कि पाकिस्तान ने भारत के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। इसके बाद से ही निवेशकों की भावनाओं पर असर साफ नजर आने लगा।
BSE में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,366 अंक टूटा
शुक्रवार को सेंसेक्स 1,366.47 अंकों की गिरावट के साथ 78,968.34 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक दिन पहले के 4,18,50,596.04 करोड़ रुपये से घटकर 4,10,19,886.37 करोड़ रुपये पर आ गया। इसका मतलब है कि ओपनिंग के साथ ही निवेशकों की दौलत में 8,30,709.67 करोड़ रुपये की भारी गिरावट आ चुकी है। जानकारों के मुताबिक अगर बाजार में इसी तरह की नेगेटिव सेंटिमेंट बनी रही, तो दिन के अंत तक नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है। सेंसेक्स में शामिल 30 में से केवल तीन शेयर टाइटन, एलएंडटी और टाटा मोटर्स ही हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। जबकि पावरग्रिड, एचसीएल टेक और एटर्नल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
स्मॉलकैप और मिडकैप स्टॉक्स भी धड़ाम
सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बुरी तरह पिटे हैं। निफ्टी का कोई भी सेक्टर आज ग्रीन जोन में नहीं है। इस गिरावट ने बाजार में फैली अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है। बीएसई पर आज कुल 2,739 शेयरों में ट्रेडिंग हो रही है, जिनमें से सिर्फ 413 शेयरों में बढ़त देखी गई, जबकि 2,258 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। विश्लेषकों की राय में मौजूदा हालात में निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। जियोपॉलिटिकल तनाव और वैश्विक संकेतकों के मिलेजुले रुख के बीच बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। भारत-पाक टकराव के बीच शेयर बाजार में गिरावट का दौर फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। निवेशकों को फिलहाल पैनिक में आने की बजाय लॉन्ग टर्म दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।




