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नाटक में दिखा झंझावातों को झेलते हुए आगे बढ़ने का जज्बा

(एकल नाटक बाल्मीकि में प्रस्तुति देते वरिष्ठ अभिनेता महेश चंद्र देवा। उनके अभिनय को दर्शकों की खूब वाहवाही मिली।)

लखनऊ फोकस ब्यूरो

लखनऊ। बाल्मीकि महोत्सव के अंतर्गत मदर सेवा संस्थान द्वारा रविवार को नवीनतम एकल नाट्य प्रस्तुति बाल्मीकि का मंचन बाल्मीकि महोत्सव पंडाल में किया गया l इस एकल नाटक के लेखक, निर्देशक एवं अभिनेता महेश चन्द्र देवा थे।

नाटक 1857 की क्रांति के दौरान मातादीन बाल्मीकि  और मंगल पांडे की संवाद से लेकर रामचंद्र बाल्मीकि के जीवन पर केंद्रित है।  रामचंद्र बाल्मीकि और उनके पिताजी मूलहे बाल्मीकि, स्वच्छता के मिशन को आगे बढ़ाते हुए पर चलते हैं लेकिन संघर्षों की पीड़ा इतनी आ जाती है कि वह अपने बच्चों का भी देखभाल नहीं कर पाते। उनका जीवन संघर्ष कई पड़ावों से गुजरता है। कई झंझावातों को झेलते हुए वह अपने लक्ष्य को पाते हैं।

नाटक में रामचंद्र बाल्मीकि के चरित्र को महेश चंद्र  देवा ने दमदार ढंग से जीवंत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

 

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