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दिल्ली की यमुना में बेकाबू होता ज़हर: पानी में 4,000 गुना तक बढ़ा बैक्टीरिया, ऑक्सीजन की भी भारी कमी

Lucknow Focus News Desk: दिल्ली में भले ही मानसून के चलते हवा कुछ हद तक साफ हो गई हो, लेकिन राजधानी की जान मानी जाने वाली यमुना नदी की हालत बद से बदतर होती जा रही है। हाल ही में आई दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि यमुना अब न सिर्फ गंदी हो रही है, बल्कि खतरनाक स्तर तक ज़हरीली भी होती जा रही है।

यमुना में मल-बैक्टीरिया की मात्रा 4000 गुना ज्यादा!

DPCC की जुलाई रिपोर्ट के मुताबिक यमुना नदी में फेकल कोलीफॉर्म (Faecal Coliform) नामक बैक्टीरिया की मात्रा चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।

आईटीओ ब्रिज के पास लिए गए सैंपल में इसकी मात्रा 92 लाख MPN/100 मिलीलीटर दर्ज की गई है, जबकि इसकी अधिकतम सुरक्षित सीमा केवल 2,500 MPN/100 मिलीलीटर है। यानी यह मानक से करीब 4,000 गुना ज्यादा है।

ये बैक्टीरिया आमतौर पर बिना ट्रीटमेंट के सीवेज के सीधे नदी में जाने से फैलते हैं और पानी को बेहद खतरनाक बना देते हैं खासकर इंसानी सेहत के लिए।

नदी में घुलती ऑक्सीजन भी कम, मछलियों का जीना मुश्किल

रिपोर्ट बताती है कि यमुना के पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है।

पानी में जितना ज्यादा BOD होगा, उसमें घुली ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) उतनी ही कम होती जाएगी और यही मछलियों और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बनता है।

पल्ला इलाके में BOD का स्तर 8 मिलीग्राम/लीटर रिकॉर्ड किया गया है, जबकि सुरक्षित स्तर 3 मिलीग्राम/लीटर या उससे कम होना चाहिए।

ITO और असगरपुर जैसे इलाकों में यह स्तर और भी ज्यादा है  70 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच चुका है।

22 नाले सीधे यमुना में गिर रहे, हालात और खराब

शहर के बीचों-बीच बहती यमुना में 22 बड़े-छोटे नाले बिना ट्रीटमेंट के सीधे गिर रहे हैं, जिससे नदी में सीवेज और गंदगी का स्तर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

जून की तुलना में जुलाई में नदी की हालत और भी खराब हो गई है। पल्ला, वजीराबाद, ISBT, ITO, निजामुद्दीन और ओखला जैसे इलाकों में BOD और फेकल कोलीफॉर्म के आंकड़े कई गुना बढ़ गए हैं।

  • आईएसबीटी: 28 लाख
  • ITO: 92 लाख
  • निजामुद्दीन: 11 लाख
  • ओखला बैराज: 22 लाख
  • आगरा नहर: 21 लाख
  • असगरपुर: 7.9 लाख

ये सभी आंकड़े सुरक्षित मानकों से 1000 से लेकर 4000 गुना तक ज्यादा हैं।

रिपोर्ट ने खोली जल संकट की आंखें

DPCC हर महीने यमुना के 8 प्रमुख स्थानों से सैंपल लेकर रिपोर्ट तैयार करता है। जुलाई की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यमुना न सिर्फ गंदी हो रही है, बल्कि इसका पानी इंसानी इस्तेमाल और जलीय जीवन के लिए बेहद ख़तरनाक होता जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर जल्द ही इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वक्त में यमुना एक ‘जहरीली नाली’ बनकर रह जाएगी।

अब क्या ज़रूरत है?

सभी नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने की ज़रूरत है।

यमुना में सीधे गिर रहे गंदे पानी को तुरंत रोका जाए।

ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने के लिए बायो-रिमेडिएशन जैसे उपाय अपनाए जाएं।

और सबसे अहम राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनसहभागिता, जो यमुना को फिर से ज़िंदा कर सके।

यमुना सिर्फ एक नदी नहीं है, यह दिल्ली की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहर है। अगर अब भी इसे बचाने के लिए नहीं जागे, तो भविष्य में सिर्फ एक सूखा हुआ, बदबूदार जलस्रोत हमारे हिस्से में रह जाएगा।

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