हास्य दिवस पर बाराबंकी में हुआ भव्य आयोजन, हंसी, साहित्य और समाजसेवा का अद्भुत संगम

लखनऊ फोकस न्यूज डेस्क
तनावपूर्ण वातावरण में हंसना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। एक बार खुलकर हंसने से शरीर की लगभग सत्तर मांसपेशियों का व्यायाम होता है। इसलिए हंसो और हंसाओ, रोगों को दूर भगाओ। यही संदेश डॉ. वीरेंद्र श्रीवास्तव संयोजक ने हास्य दिवस के उपलक्ष्य में हनुमान पुरी कालोनी में शान्ति पुरम सेवा समिति बाराबंकी के तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में व्यक्त किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेश चन्द्र बैसवार ने की और सफल संचालन व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ द्वारा किया गया। इस आयोजन में समाजसेवी, पत्रकार और साहित्यकार रत्नेश कुमार को नशामुक्ति जागरूकता अभियान चलाकर आमजन को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने के लिए माल्यार्पण और शाल अर्पण कर अभिनंदन किया गया।
इसी क्रम में जनपद बाराबंकी के औद्यानिक प्रगतिशील किसान प्रमोद कुमार वर्मा (सफीपुर विकास खण्ड बंकी) और सुनील कुमार वर्मा (मीनापुर विकास खण्ड हरख) को उनकी स्ट्रॉबेरी, शाकभाजी और फूलों की खेती के माध्यम से जिले का नाम रोशन करने हेतु सम्मानित किया गया। भक्ति पूर्ण गायन के लिए नींबू लाल गुप्ता को भी संयोजक डॉ. वीरेंद्र श्रीवास्तव द्वारा सम्मानित किया गया।

‘मन की बात’ कार्यक्रम के अंतर्गत रामचन्द्र वर्मा, रज्जन लाल श्रीवास्तव, रविन्द्र यादव, नौमी लाल, के. के. शर्मा, योगेंद्र प्रसाद वर्मा ने उत्प्रेरक प्रसंग सुनाए। कार्यक्रम की एक और विशेषता हास्य काव्य गोष्ठी रही जिसका आगाज युवा गीतकार साहब नारायण शर्मा की वाणी वंदना से हुआ।
व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव लल्लू ने हास्य दिवस की बधाई देते हुए कहा:
“हंसना और हंसाना सीखो, जीवन में मुस्काना सीखो,
नाखूनों को मत बढ़ने दो, हंसकर खून बढ़ाना सीखो।”
जितेन्द्र श्रीवास्तव जीतू, सनत कुमार वर्मा अनाड़ी ने अपनी हास्य-व्यंग्य कविताएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवा गीतकार साहब नारायण शर्मा ने मुक्तक गीत प्रस्तुत किया जबकि ओज कवि दीपक दिवाकर ने पढ़ा:
“मिट जायेंगे हम लेकिन एहसास नहीं मिटने देंगे,
हम अपना गौरव शाली इतिहास नहीं मिटने देंगे।”
कवियित्री लता श्रीवास्तव ने दहेज गीत प्रस्तुत किया। सियाराम रावत, योगेंद्र नाथ वर्मा, राधेश दीक्षित, रामबालक मिश्रा, शत्रोहन लाल वर्मा, प्रशान्त श्रीवास्तव ने भी अपनी हास्य और व्यंग्यपूर्ण रचनाओं से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। रत्नेश कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराइयों को उजागर करते हैं और उनके समाधान में समाजसेवी, पत्रकार और साहित्यकार अहम भूमिका निभाते हैं।
कृषक सुनील वर्मा एवं प्रमोद वर्मा ने बताया कि औद्यानिक तकनीकी खेती-बाड़ी के माध्यम से वे न केवल अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि समाज को स्वास्थ्यवर्धक फल, शाकभाजी और फूल उपलब्ध कराने में भी योगदान दे रहे हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेश चंद्र बैसवार ने कहा कि हमें जीवन की धारा के साथ बहते हुए उसे पूरी तरह से अनुभव करना चाहिए और सदैव आनंदित रहना चाहिए।
गद्य-पद्य में विचारों की अभिव्यक्ति और आभार
कार्यक्रम में दिनेश सिंह, उमेश श्रीवास्तव, अनुपम त्रिपाठी एडवोकेट, अम्बरीष श्रीवास्तव एडवोकेट, पार्थ श्रीवास्तव ने गद्य और पद्य में अपने विचार व्यक्त किए। अंत में आयोजक अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ ने आए हुए अतिथियों, समिति पदाधिकारियों, साहित्यकारों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद किया। बाराबंकी में आयोजित यह हास्य दिवस कार्यक्रम हंसी, साहित्य, समाज सेवा और कृषि नवाचार के अद्वितीय मेल का साक्षी बना। ऐसे आयोजनों से न केवल सामाजिक चेतना जागृत होती है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है।




