Caste Census – Lucknow Focus http://lucknowfocus.com Lucknow Focus Mon, 06 Apr 2026 08:07:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 http://lucknowfocus.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Capture-32x32.jpg Caste Census – Lucknow Focus http://lucknowfocus.com 32 32 देश में 16 साल बाद डिजिटल जनगणना का शंखनाद: पहले घरों की होगी लिस्टिंग, फिर जाति के आधार पर गिने जाएंगे लोग http://lucknowfocus.com/digital-and-caste-census-2026-india-phases-and-privacy/ http://lucknowfocus.com/digital-and-caste-census-2026-india-phases-and-privacy/#respond Mon, 06 Apr 2026 08:07:37 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=13157 Lucknow Focus News Desk: भारत में करीब 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जनगणना का कार्य एक नए और आधुनिक स्वरूप में शुरू होने जा रहा है। देश की अंतिम जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि इसमें जातीय आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संपन्न की जाएगी।

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

जनगणना के इस विशाल कार्य को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है।

सबसे पहले घरों की गिनती की जाएगी। इसके साथ ही घर में प्रयुक्त सामग्री और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

दूसरे चरण में लोगों की गणना जाति के आधार पर होगी। डिजिटल माध्यम होने के कारण डेटा संग्रह की गति तेज रहेगी और वर्ष 2027 तक अंतिम आंकड़े सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।

गोपनीयता का ‘अभेद कवच’

इस बार जनगणना में आंकड़ों की गोपनीयता पर सबसे अधिक जोर दिया गया है। बांदा के एडीएम (राजस्व व वित्त) कुमार धर्मेंद्र ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया। जनगणना का डेटा न तो किसी सरकारी योजना के लाभ के लिए उपयोग होगा और न ही इसे अदालत में साक्ष्य (Evidence) के रूप में पेश किया जा सकेगा। व्यक्तिगत जानकारी को सूचना का अधिकार (RTI) के दायरे से भी बाहर रखा गया है। सार्वजनिक मंचों पर केवल समग्र (Aggregate) आंकड़े ही जारी किए जाएंगे। इन सख्त नियमों का मकसद जनता में भरोसा पैदा करना है ताकि वे बिना किसी डर के सटीक और सही जानकारी साझा करें।

प्रशासनिक तैयारी: 50 हजार कर्मचारियों की फौज

जनगणना को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए केवल बांदा जैसे जिलों में ही 50 हजार से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की तैयारी है। पूरे देश में लाखों की संख्या में गणनाकार तैनात किए जाएंगे।

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Census : 1947 की जनगणना में देश की कैसी थी तस्वीर और अब कैसे हैं हालात? http://lucknowfocus.com/census-what-was-the-picture-of-the-country-in-the-1947-census-and-what-is-the-situation-now/ Fri, 04 Jul 2025 06:51:53 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4701 Lucknow Focus News Desk: आज़ादी के 78 साल बाद देश एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। केंद्र सरकार जल्द ही 16वीं जनगणना कराने की तैयारी में है, जो कई मायनों में बेहद विशेष और ऐतिहासिक होगी। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, और खास बात ये है कि इसके साथ ही सरकार जातिगत जनगणना भी करवाने जा रही है  ऐसा 16 सालों में पहली बार होगा।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ादी के बाद जब देश में पहली बार जनगणना कराई गई थी, तो देश की आर्थिक और सामाजिक हालत कैसी थी? आइए, जानते हैं कि उस दौर में भारत कैसा था और अब तक हम कहां पहुंचे हैं।

1947 की जनगणना में देश की तस्वीर कैसी थी?

जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ, तब देश की कुल आबादी महज 34 करोड़ थी।

अब यह आंकड़ा 140 करोड़ से ज्यादा हो चुका है यानी 78 सालों में आबादी 100 करोड़ से अधिक बढ़ गई।

आज़ादी के समय एक आम व्यक्ति की सालाना आय सिर्फ ₹280 के आसपास थी। आज यह आंकड़ा ₹1.30 लाख तक पहुंच चुका है।

यदि तुलना करें तो आज के दौर में लोग एक बार की डिनर पार्टी में जितना खर्च कर देते हैं, उतना तब पूरा सालभर में कमाया जाता था।

आज़ादी के समय देश में कितनी थी गरीबी?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज़ादी के समय लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे थे, यानी कुल जनसंख्या का करीब 80% हिस्सा गरीब था।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर गरीबी के आंकड़े 1956 से दर्ज किए जाने लगे, जब बी.एस. मिन्हास समिति ने योजना आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

उस रिपोर्ट में बताया गया था कि 21.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे थे।

अब कौन है गरीब? जानिए सरकारी पैमाना

यूपीए सरकार के कार्यकाल में बनी रंगराजन कमेटी के अनुसार:

शहर में ₹47 प्रतिदिन से कम खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब माना जाएगा।

गांव में ₹32 प्रतिदिन से कम खर्च करने वाला व्यक्ति भी गरीब की श्रेणी में आएगा।

हालांकि इस परिभाषा को लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

एक और मानक के अनुसार:

अगर कोई शहरी नागरिक ₹1,000 प्रति माह कमा रहा है या

कोई ग्रामीण नागरिक ₹816 प्रति माह, तो उसे गरीब नहीं माना जाएगा।

वर्तमान में गरीबी का क्या हाल है?

सरकार के पास मौजूद ताज़ा आंकड़े 2011-12 के हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी करीब 26.9 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं।

जनगणना 2025 की ओर बढ़ते कदम

आने वाली जनगणना भारत की अब तक की सबसे तकनीकी और व्यापक जनगणना होगी।

पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा।

जातिगत जनगणना से यह समझने में मदद मिलेगी कि समाज में कौन-कौन सी जातियां कहां और किस स्थिति में हैं।

भारत ने जनगणना के सफर में एक लंबा रास्ता तय किया है। कभी एक थैली में फार्म भरकर गांव-गांव घूमते कर्मचारी होते थे, अब डिजिटल डिवाइसेज़ और डेटा एनालिटिक्स के जरिए देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बनेगी। लेकिन, गरीबी का चेहरा आज भी पूरी तरह नहीं बदला है। नई जनगणना उम्मीदें जगा रही है कि डिजिटल भारत अब सटीक और समावेशी नीतियों की दिशा में एक और कदम बढ़ाएगा।

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जनगणना की अधिसूचना जारी, जानिए किन 4 राज्यों में 6 महीने पहले शुरू होगी? http://lucknowfocus.com/census-notification-issued-know-in-which-4-states-it-will-start-6-months-earlier/ Mon, 16 Jun 2025 11:27:53 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4386 Lucknow Focus News Desk: लंबे समय से जिस ऐलान का इंतजार था, वह अब खत्म हो गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने सोमवार को जनगणना अधिनियम 1948 के तहत राष्ट्रीय जनगणना 2027 और जातीय गणना से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। इस अधिसूचना के साथ ही देश की अगली जनगणना प्रक्रिया का बिगुल बज गया है।

कब और कैसे होगी जनगणना?

अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण (हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन) की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 (ठंडे और दुर्गम इलाकों में) होगी। जिसका उद्देश्य हर घर की स्थिति, सुविधाएं, संसाधन और निर्माण से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करना।

दूसरा चरण 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को जनसंख्या की गणना की ‘कट-ऑफ डेट’ माना जाएगा। इसका उद्देश्य हर व्यक्ति का नाम, उम्र, लिंग, धर्म, जाति, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति आदि का विवरण लेना। पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में मौसम को देखते हुए हाउस लिस्टिंग पहले शुरू होगी।

जनगणना में क्या-क्या होगा शामिल?

जातिवार गणना (Caste-based Census): यह जनगणना 1931 के बाद पहली बार होगी जिसमें सभी जातियों से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाएगा।

डिजिटल जनगणना: पहली बार इस जनगणना में मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया जाएगा।

लोगों को स्व-गणना (Self Enumeration) की भी सुविधा दी जाएगी।

डेटा जारी करने की समय-सीमा: प्रारंभिक आंकड़े मार्च 2027 में ही जारी हो सकते हैं। लेकिन विस्तृत आंकड़ों के लिए वर्ष के अंत तक का इंतजार करना होगा।

कितनी होगी जनशक्ति की जरूरत?

  • इस विशाल अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर मानव संसाधन की आवश्यकता होगी:
  • 34 लाख गणनाकार और पर्यवेक्षक (Enumerator & Supervisor) तैनात किए जाएंगे।
  • 1.3 लाख से अधिक सीनियर ऑफिसर्स को योजना, निगरानी और प्रबंधन के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
  • इतिहास में विशेष स्थान रखेगी जनगणना 2027
  • यह भारत की 16वीं जनगणना होगी (1872 से अब तक)
  • और स्वतंत्रता के बाद 8वीं बार देशव्यापी जनगणना की जा रही है।
  • पिछली बार जनगणना 2011 में हुई थी।

कोरोना महामारी के कारण 2021 की जनगणना टाल दी गई थी, जिसके चलते अब 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह आयोजन हो रहा है।

जनगणना क्यों है अहम?

जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना की बुनियाद है। चुनावी परिसीमन इसी के आधार पर होता है (अनुच्छेद 82) और एससी/एसटी आरक्षण, संसाधन आवंटन, योजनाओं की रूपरेखा, स्कूल–अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों की योजना इसी डेटा से बनती है।

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‘140 करोड़ देशवासियों के हित में ऐतिहासिक फैसला’, जातिगत जनगणना पर सीएम योगी और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया http://lucknowfocus.com/historical-decision-in-the-interest-of-140-crore-countrymen-response-to-cm-yogi-and-allies-on-caste-census/ Thu, 01 May 2025 06:52:59 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=3349 केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति द्वारा इस निर्णय को स्वीकृति देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों ने इस कदम का समर्थन किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा 140 करोड़ देशवासियों के समग्र हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जातिगत जनगणना कराने का निर्णय अभूतपूर्व एवं स्वागत योग्य है। यह वंचित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं में भागीदारी दिलाने की दिशा में निर्णायक पहल है। सीएम योगी ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए इसे “सामाजिक न्याय और डाटा-आधारित सुशासन” की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जातिगत जनगणना के फैसले को देश के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में अहम कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे “देश में एक नई ऊर्जा का संचार होगा, जो विकसित भारत की दिशा में सहायक सिद्ध होगी।” उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहते हुए भी कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।

दशकों की उपेक्षा का अंत: ब्रजेश पाठक

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित समाज के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि जातिगत आंकड़े लोकतंत्र को मजबूत करेंगे और नीति निर्माण में पारदर्शिता तथा न्याय सुनिश्चित करेंगे।

भाजपा के सहयोगी दलों ने भी जातिगत जनगणना के निर्णय का समर्थन किया है। अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे “वंचित वर्गों के हक में लिया गया फैसला” बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने सड़क से संसद तक लगातार इसकी वकालत की है।

सुभासपा के मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा यह फैसला सिर्फ जनगणना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव है। निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद ने भी फैसले की सराहना करते हुए कहा कि मछुआरा समाज प्रधानमंत्री का आभारी है।

जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से आई प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि यह मुद्दा केवल जनगणना तक सीमित नहीं, बल्कि नीति निर्धारण, योजनाओं के क्रियान्वयन और हाशिए पर खड़े समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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