Modi government – Lucknow Focus http://lucknowfocus.com Lucknow Focus Thu, 04 Sep 2025 05:46:10 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 http://lucknowfocus.com/wp-content/uploads/2022/03/cropped-Capture-32x32.jpg Modi government – Lucknow Focus http://lucknowfocus.com 32 32 मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला: GST में सबसे बड़ा सुधार लागू, कई चीजें हुईं सस्ती http://lucknowfocus.com/modi-governments-historic-decision-the-biggest-improvement-in-gst-many-things-are-cheap/ Thu, 04 Sep 2025 05:46:10 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=5833 Lucknow Focus News Desk: केंद्र सरकार ने जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) में अब तक का सबसे बड़ा सुधार लागू करने का ऐलान किया है। जीएसटी काउंसिल की दो दिवसीय बैठक के पहले दिन कई बड़े फैसले लिए गए, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। सरकार ने इसे “नेक्स्ट-जेनरेशन GST रिफॉर्म” का नाम दिया है, जो 22 सितंबर 2025 से पूरे देश में लागू होगा।

अब इन चीज़ों पर लगेगा कम टैक्स

सरकार ने दैनिक इस्तेमाल की कई ज़रूरी चीज़ों पर टैक्स कम कर दिया है, जिससे वे सस्ती हो जाएंगी।

डेयरी और किचन आइटम्स: बटर, घी, चीज़, पैकेज्ड नमकीन और मिक्सचर पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।

दैनिक उपयोग के उत्पाद: हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट, साबुन, शेविंग क्रीम और टूथब्रश पर अब 18% की जगह सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा।

स्वास्थ्य सेवा: हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर लगने वाला 18% जीएसटी पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसके अलावा, मेडिकल-ग्रेड ऑक्सीजन, ग्लूकोमीटर, और थर्मामीटर पर अब सिर्फ 5% जीएसटी लगेगा।

बच्चों की पढ़ाई: मैप, चार्ट, ग्लोब, नोटबुक, पेंसिल और इरेज़र जैसे स्टेशनरी आइटम्स पर अब तक लगने वाला 5% या 12% जीएसटी शून्य कर दिया गया है।

किसानों, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स को भी राहत

कृषि: ट्रैक्टर और उसके पार्ट्स पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खेती की लागत कम होगी।

ऑटोमोबाइल: कुछ पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी गाड़ियों को 28% से घटाकर 18% के स्लैब में लाया गया है।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: एयर कंडीशनर, बड़े LED/LCD टीवी, और डिशवॉशर पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।

टैक्स सिस्टम हुआ और भी सरल

सरकार ने टैक्स स्लैब को भी सरल बनाया है। अब 12% और 28% वाले स्लैब हटा दिए गए हैं, और ज़्यादातर उत्पाद 5% और 18% के स्लैब में ही रहेंगे। इसके अलावा, जीएसटी रजिस्ट्रेशन अब सिर्फ 3 वर्किंग डेज में होगा, और रिफंड की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन फैसलों का स्वागत करते हुए कहा कि ये सुधार ‘जीवन को बेहतर’ बनाने और ‘व्यापार को आसान’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

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केंद्र सरकार के कर्मचारियों को रक्षाबंधन से पहले बड़ी खुशखबरी, DA में हो सकती है 4% तक बढ़ोतरी http://lucknowfocus.com/central-government-employees-may-increase-in-great-news-before-rakshabandhan-to-4/ Tue, 22 Jul 2025 06:51:54 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=5072 Lucknow Focus News Desk: देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए रक्षाबंधन से पहले एक अच्छी खबर आने की उम्मीद है। केंद्र सरकार जल्द ही महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) में इजाफे का ऐलान कर सकती है। अनुमान है कि जुलाई 2025 में DA में 3 से 4 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।

DA में बढ़ोतरी का बेस AICPI-IW डेटा

महंगाई भत्ते की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आधार पर की जाती है, जिसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत श्रम ब्यूरो हर महीने जारी करता है। ये आंकड़े देश के 88 औद्योगिक केंद्रों के 317 बाजारों से जुटाई गई खुदरा कीमतों पर आधारित होते हैं।

मार्च 2025 में CPI-IW इंडेक्स 143 अंक पर था, जो मई तक बढ़कर 144 पर पहुंच गया है। इन आंकड़ों के आधार पर एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि जुलाई 2025 से DA में 3 से 4 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।

वर्तमान में DA दर 55%

सरकार साल में दो बार – जनवरी और जुलाई के लिए – महंगाई भत्ते की समीक्षा करती है, जिसकी घोषणा आमतौर पर मार्च और सितंबर में की जाती है। मार्च 2025 में 2% की बढ़ोतरी के साथ फिलहाल DA 55% पर है। यह लाभ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलता है, जबकि पेंशनर्स को इसी के समान Dearness Relief (DR) दिया जाता है।

अगर जुलाई में DA में 3-4% की बढ़ोतरी होती है तो यह दर 58% या 59% तक पहुंच सकती है।

महंगाई भत्ता कैसे होता है कैलकुलेट?

सरकार पिछले 12 महीनों के CPI-IW औसत के आधार पर निम्नलिखित फॉर्मूले से DA की गणना करती है। महंगाई भत्ता (%) = [(12 महीने का औसत CPI-IW – 261.42) ÷ 261.42] × 100, यहां 261.42 को 7वें वेतन आयोग के आधार पर तय बेस इंडेक्स माना गया है।

ग्रामीण मुद्रास्फीति में गिरावट का भी असर

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 में कृषि और ग्रामीण श्रमिकों के लिए खुदरा महंगाई घटकर क्रमश: 2.84% और 2.97% पर आ गई, जो अप्रैल में 3.5% से अधिक थी। CPI-AL और CPI-RL इंडेक्स भी मामूली गिरकर क्रमश: 1305 और 1319 अंक पर आ गए हैं। हालांकि ये इंडेक्स सीधे तौर पर DA की गणना में शामिल नहीं होते, लेकिन इससे CPI-IW में भी स्थिरता या सीमित बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं।

अंतिम फैसला कब होगा?

अभी सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जून 2025 के CPI-IW आंकड़े जारी होने के बाद सितंबर या अक्टूबर 2025 में DA में बढ़ोतरी का ऐलान किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो रक्षाबंधन (जो 18 अगस्त को है) से पहले ही कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है।

रिटेल महंगाई और CPI-IW में आए बदलावों के मद्देनज़र जुलाई 2025 में DA में 3-4% तक इजाफा तय माना जा रहा है। इससे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिल सकती है।

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21 जुलाई से शुरू होगा संसद का मॉनसून सत्र, सरकार ला सकती है कई अहम बिल, विपक्ष भी पूरी तैयारी में http://lucknowfocus.com/the-monsoon-session-of-parliament-will-start-from-july-21-the-government-can-bring-many-important-bills-in-full-preparation/ Wed, 16 Jul 2025 06:04:11 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4962 Lucknow Focus News Desk: देश की संसद का मॉनसून सत्र जल्द ही शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही राजनीतिक हलचलें भी तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जहां सत्र के दौरान कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, वहीं विपक्षी दल भी सरकार को घेरने के लिए मोर्चाबंदी में जुट चुके हैं।

संसद का यह मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त 2025 तक चलेगा। पहले यह सत्र 12 अगस्त को खत्म होने वाला था, लेकिन सरकार ने इसे एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का फैसला लिया है ताकि जरूरी विधायी कार्यों को पूरा किया जा सके।

सरकार के एजेंडे में ये बड़े बिल हो सकते हैं शामिल

सूत्रों के मुताबिक, इस बार संसद में जिन प्रमुख विधेयकों को पेश किया जा सकता है, उनमें शामिल हैं:

  • मणिपुर GST (संशोधन) विधेयक 2025
  • जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025
  • भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025
  • टैक्सेशन लॉ (संशोधन) विधेयक 2025
  • भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष संरक्षण विधेयक 2025
  • खान एवं खनिज विकास (संशोधन) विधेयक 2025
  • राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025
  • राष्ट्रीय एंटी डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025

इसके अलावा जिन बिलों को लोकसभा में पारित कराने की उम्मीद जताई जा रही है, उनमें शामिल हैं:

  • गोवा विधानसभा क्षेत्रों में ST प्रतिनिधित्व पुनर्समायोजन विधेयक 2024
  • मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2024
  • भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025
  • आयकर विधेयक 2025
  • विपक्ष भी पूरी तरह से तैयार

जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कमर कस चुकी है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी कई अहम मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी में हैं।

संभावित मुद्दों में बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, और अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।

कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने 15 जुलाई को पार्टी नेताओं के साथ एक रणनीतिक बैठक भी की, जिसमें मानसून सत्र के दौरान पार्टी की भूमिका और मुद्दों पर चर्चा की गई।

कड़ा सत्र होने के आसार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सत्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहसों और रणनीतिक टकरावों से भरा हो सकता है। जहां सरकार विकास और सुधार से जुड़े बिलों पर ज़ोर देगी, वहीं विपक्ष जनहित और लोकतांत्रिक मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगेगा।

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Census : 1947 की जनगणना में देश की कैसी थी तस्वीर और अब कैसे हैं हालात? http://lucknowfocus.com/census-what-was-the-picture-of-the-country-in-the-1947-census-and-what-is-the-situation-now/ Fri, 04 Jul 2025 06:51:53 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4701 Lucknow Focus News Desk: आज़ादी के 78 साल बाद देश एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। केंद्र सरकार जल्द ही 16वीं जनगणना कराने की तैयारी में है, जो कई मायनों में बेहद विशेष और ऐतिहासिक होगी। इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, और खास बात ये है कि इसके साथ ही सरकार जातिगत जनगणना भी करवाने जा रही है  ऐसा 16 सालों में पहली बार होगा।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ादी के बाद जब देश में पहली बार जनगणना कराई गई थी, तो देश की आर्थिक और सामाजिक हालत कैसी थी? आइए, जानते हैं कि उस दौर में भारत कैसा था और अब तक हम कहां पहुंचे हैं।

1947 की जनगणना में देश की तस्वीर कैसी थी?

जब 1947 में भारत आज़ाद हुआ, तब देश की कुल आबादी महज 34 करोड़ थी।

अब यह आंकड़ा 140 करोड़ से ज्यादा हो चुका है यानी 78 सालों में आबादी 100 करोड़ से अधिक बढ़ गई।

आज़ादी के समय एक आम व्यक्ति की सालाना आय सिर्फ ₹280 के आसपास थी। आज यह आंकड़ा ₹1.30 लाख तक पहुंच चुका है।

यदि तुलना करें तो आज के दौर में लोग एक बार की डिनर पार्टी में जितना खर्च कर देते हैं, उतना तब पूरा सालभर में कमाया जाता था।

आज़ादी के समय देश में कितनी थी गरीबी?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज़ादी के समय लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे थे, यानी कुल जनसंख्या का करीब 80% हिस्सा गरीब था।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर गरीबी के आंकड़े 1956 से दर्ज किए जाने लगे, जब बी.एस. मिन्हास समिति ने योजना आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

उस रिपोर्ट में बताया गया था कि 21.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे थे।

अब कौन है गरीब? जानिए सरकारी पैमाना

यूपीए सरकार के कार्यकाल में बनी रंगराजन कमेटी के अनुसार:

शहर में ₹47 प्रतिदिन से कम खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब माना जाएगा।

गांव में ₹32 प्रतिदिन से कम खर्च करने वाला व्यक्ति भी गरीब की श्रेणी में आएगा।

हालांकि इस परिभाषा को लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

एक और मानक के अनुसार:

अगर कोई शहरी नागरिक ₹1,000 प्रति माह कमा रहा है या

कोई ग्रामीण नागरिक ₹816 प्रति माह, तो उसे गरीब नहीं माना जाएगा।

वर्तमान में गरीबी का क्या हाल है?

सरकार के पास मौजूद ताज़ा आंकड़े 2011-12 के हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी करीब 26.9 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं।

जनगणना 2025 की ओर बढ़ते कदम

आने वाली जनगणना भारत की अब तक की सबसे तकनीकी और व्यापक जनगणना होगी।

पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा।

जातिगत जनगणना से यह समझने में मदद मिलेगी कि समाज में कौन-कौन सी जातियां कहां और किस स्थिति में हैं।

भारत ने जनगणना के सफर में एक लंबा रास्ता तय किया है। कभी एक थैली में फार्म भरकर गांव-गांव घूमते कर्मचारी होते थे, अब डिजिटल डिवाइसेज़ और डेटा एनालिटिक्स के जरिए देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर बनेगी। लेकिन, गरीबी का चेहरा आज भी पूरी तरह नहीं बदला है। नई जनगणना उम्मीदें जगा रही है कि डिजिटल भारत अब सटीक और समावेशी नीतियों की दिशा में एक और कदम बढ़ाएगा।

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मोदी सरकार के 11 वर्षों की उपलब्धियों पर लखनऊ में संगोष्ठी, पत्रकारों ने उठाए प्रिंट मीडिया से जुड़े मुद्दे http://lucknowfocus.com/seminar-in-lucknow-on-the-achievements-of-11-years-of-modi-government-journalists-raised-issues-related-to-print-media/ Sun, 29 Jun 2025 12:31:20 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4608 Lucknow Focus News Desk:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 11 वर्ष पूरे होने के अवसर पर “11 वर्ष: कितना हर्ष, कितना उत्कर्ष” विषय पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम लखनऊ प्रिंट मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट संगठन के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सूचना आयुक्त दिलीप अग्निहोत्री, वरिष्ठ पत्रकार पदम कांत शर्मा और सर्वेश चंद्र द्विवेदी (निदेशक, राष्ट्रधर्म) द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। संगोष्ठी की अध्यक्षता खुद द्विवेदी ने की, जबकि नवरत्न कंपनी, भारत सरकार के निदेशक चंद्र भूषण पांडेय बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।

उपलब्धियां, चुनौतियां और संविधान पर चिंतन

संगोष्ठी में वक्ताओं ने मोदी सरकार की 11 साल की यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। केंद्र सरकार की योजनाओं, भारत की वैश्विक साख में वृद्धि और ऑपरेशन सिंधूर जैसे साहसिक कदमों को सराहा गया।

इस दौरान पत्रकारों ने केंद्र सरकार की प्रिंट मीडिया नीति पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि सरकारी रवैये के चलते प्रिंट मीडिया को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिन पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई की ज़रूरत है।

सर्वेश चंद्र द्विवेदी ने अपने विचार रखते हुए कहा, “आज हमें सोचना होगा कि क्या संविधान के प्रावधानों पर वास्तव में अमल हो रहा है? अंग्रेजी भाषा का बोलबाला अब भी बना हुआ है, जबकि संविधान इसकी अनुमति नहीं देता। लोकसेवकों को जनता का सेवक होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में वे शासक की भूमिका निभा रहे हैं। जब तक सच्चे अर्थों में संविधान लागू नहीं होता, भारत अपने पूर्वजों के सपनों का देश नहीं बन पाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि आज न्यायपालिका, पत्रकारिता और ब्यूरोक्रेसी तीनों ही संविधान की मूल भावना से दूर जाते दिख रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता को सहकारिता मॉडल पर चलाए जाने की बात दोहराई, जिससे यह स्वतंत्र और निष्पक्ष रह सके।

वोटर प्रणाली और चुनाव आयोग पर भी उठे सवाल

द्विवेदी ने नेता प्रतिपक्ष का नाम लिए बिना निशाना साधते हुए कहा कि संविधान के अनुसार दोषी व्यक्ति को वोट देने का अधिकार नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग इस दिशा में अब तक कोई ठोस उदाहरण पेश नहीं कर पाया है। उन्होंने वोटर बनने के लिए सख्त प्रावधानों की ज़रूरत पर बल दिया।

संगोष्ठी में कई वरिष्ठ पत्रकारों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विचार साझा किए। डॉ. सुयश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार हरिराम त्रिपाठी, भाजपा नेता प्रदीप सिंह बब्बू, पत्रकार अब्दुल वाहिद सहित कई लोगों ने देश में लोकतंत्र, मीडिया स्वतंत्रता और सरकार की उपलब्धियों पर बात की। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र अग्निहोत्री ने किया।

संवेदनशील मुद्दों पर खुली बातचीत, जनहित की आवाज़ बनी

संस्था के अध्यक्ष अजीज सिद्दीकी ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने दुपट्टा उड़ाकर परंपरागत रूप से अभिनंदन किया।

संगोष्ठी में डॉ. रीमा सिन्हा, भ्रमर बैसवारी, अनवर आलम, गुलाम हुसैन, जावेद (छायाकार), फिरोज बाबा, गिरिराज शर्मा, नवीन श्रीवास्तव, मुस्ताक अहमद, डॉ. राजेश वर्मा, गिरीश कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, कवि, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

यह संगोष्ठी न सिर्फ मोदी सरकार के 11 साल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा बनी, बल्कि मीडिया, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर संवाद हुआ। वक्ताओं की बातों से यह साफ झलका कि देश के विकास में जहां सरकार की उपलब्धियाँ सराहनीय हैं, वहीं कुछ बुनियादी सवाल आज भी चर्चा का विषय हैं।

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जनगणना की अधिसूचना जारी, जानिए किन 4 राज्यों में 6 महीने पहले शुरू होगी? http://lucknowfocus.com/census-notification-issued-know-in-which-4-states-it-will-start-6-months-earlier/ Mon, 16 Jun 2025 11:27:53 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4386 Lucknow Focus News Desk: लंबे समय से जिस ऐलान का इंतजार था, वह अब खत्म हो गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने सोमवार को जनगणना अधिनियम 1948 के तहत राष्ट्रीय जनगणना 2027 और जातीय गणना से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी कर दी है। इस अधिसूचना के साथ ही देश की अगली जनगणना प्रक्रिया का बिगुल बज गया है।

कब और कैसे होगी जनगणना?

अधिसूचना के अनुसार, जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण (हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन) की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 (ठंडे और दुर्गम इलाकों में) होगी। जिसका उद्देश्य हर घर की स्थिति, सुविधाएं, संसाधन और निर्माण से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करना।

दूसरा चरण 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को जनसंख्या की गणना की ‘कट-ऑफ डेट’ माना जाएगा। इसका उद्देश्य हर व्यक्ति का नाम, उम्र, लिंग, धर्म, जाति, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति आदि का विवरण लेना। पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में मौसम को देखते हुए हाउस लिस्टिंग पहले शुरू होगी।

जनगणना में क्या-क्या होगा शामिल?

जातिवार गणना (Caste-based Census): यह जनगणना 1931 के बाद पहली बार होगी जिसमें सभी जातियों से जुड़ा डेटा इकट्ठा किया जाएगा।

डिजिटल जनगणना: पहली बार इस जनगणना में मोबाइल ऐप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया जाएगा।

लोगों को स्व-गणना (Self Enumeration) की भी सुविधा दी जाएगी।

डेटा जारी करने की समय-सीमा: प्रारंभिक आंकड़े मार्च 2027 में ही जारी हो सकते हैं। लेकिन विस्तृत आंकड़ों के लिए वर्ष के अंत तक का इंतजार करना होगा।

कितनी होगी जनशक्ति की जरूरत?

  • इस विशाल अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर मानव संसाधन की आवश्यकता होगी:
  • 34 लाख गणनाकार और पर्यवेक्षक (Enumerator & Supervisor) तैनात किए जाएंगे।
  • 1.3 लाख से अधिक सीनियर ऑफिसर्स को योजना, निगरानी और प्रबंधन के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
  • इतिहास में विशेष स्थान रखेगी जनगणना 2027
  • यह भारत की 16वीं जनगणना होगी (1872 से अब तक)
  • और स्वतंत्रता के बाद 8वीं बार देशव्यापी जनगणना की जा रही है।
  • पिछली बार जनगणना 2011 में हुई थी।

कोरोना महामारी के कारण 2021 की जनगणना टाल दी गई थी, जिसके चलते अब 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह आयोजन हो रहा है।

जनगणना क्यों है अहम?

जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि यह देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना की बुनियाद है। चुनावी परिसीमन इसी के आधार पर होता है (अनुच्छेद 82) और एससी/एसटी आरक्षण, संसाधन आवंटन, योजनाओं की रूपरेखा, स्कूल–अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों की योजना इसी डेटा से बनती है।

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GDP डेटा के बाद सरकार की बड़ी घोषणा: खाने के तेल की कीमतों में आएगी राहत, टैक्स में कटौती http://lucknowfocus.com/governments-big-announcement-after-gdp-data-relief-in-edible-oil-prices-tax-cut/ Sat, 31 May 2025 07:22:18 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=4034 Lucknow Focus News Desk: देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी अच्छी खबरों के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत भरी सूचना सामने आई है। केंद्र सरकार ने खाने के तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करने का ऐलान किया है, जिससे आगामी दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। यह कदम 31 मई से प्रभावी हो गया है।

कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती

सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, कच्चे पाम तेल, कच्चे सोया तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इस फैसले के बाद इन तेलों पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी घटकर 27.5% से 16.5% हो गई है। हालांकि, यह अब भी एग्री सेस (कृषि उपकर) के अधीन रहेगा।

भारत अपनी वनस्पति तेल की जरूरतों का लगभग 70% हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। मुख्य रूप से पाम तेल की खरीद इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड से होती है, जबकि सोया और सूरजमुखी तेल का इंपोर्ट अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से किया जाता है।

कीमतों में संभावित गिरावट

इस नीति परिवर्तन से न केवल घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतें नियंत्रित होंगी, बल्कि इससे विदेशी खरीद बढ़ने की भी उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे पाम, सोया और सूरजमुखी तेल की मांग में इजाफा हो सकता है।

किस पर कितना घटा टैक्स?

  • तेल का नाम  पहले की ड्यूटी (%)   अब की ड्यूटी (%)    कुल आयात शुल्क (%)
  • कच्चा पाम तेल      20%        10%        16.5%
  • कच्चा सोया तेल     20%        10%        16.5%
  • कच्चा सूरजमुखी तेल  20%        10%        16.5%

रिफाइंड तेलों पर आयात शुल्क 35.75% बना रहेगा, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या होगा असर?

सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम महंगाई पर नियंत्रण के साथ-साथ घरेलू बाजार में स्थिरता लाने की दिशा में एक अहम फैसला माना जा रहा है। आगामी दिनों में ग्राहकों को तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है।

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केंद्र और राज्य मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करें, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं: PM मोदी http://lucknowfocus.com/if-the-centre-and-states-work-together-like-team-india-then-no-goal-is-difficult-pm-modi/ Sat, 24 May 2025 09:29:42 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=3928 Lucknow Focus News Desk: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार और राज्य मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। मोदी नीति आयोग की 10वीं शासी परिषद की बैठक में कहा कि विकास की गति बढ़ाने की जरूरत है।

नीति आयोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री के हवाले से कहा हमें विकास की गति बढ़ानी होगी। अगर केंद्र और सभी राज्य मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। नीति आयोग का शीर्ष निकाय शासी परिषद की बैठक का विषय ‘2047 में विकसित भारत के लिए विकसित राज्य’ है।

मोदी ने कहा विकसित भारत हर भारतीय का लक्ष्य है। जब हर राज्य विकसित होगा तो भारत विकसित होगा। यह इसके 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षा है। उन्होंने यह भी कहा राज्यों को अपने-अपने यहां सभी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप कम-से-कम एक पर्यटन गंतव्य विकसित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा एक राज्य: एक वैश्विक गंतव्य’ का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इससे पर्यटन गंतव्य के रूप में आस-पास के शहरों के विकास का रास्ता साफ होगा। नीति आयोग की शीर्ष इकाई शासी परिषद में सभी मुख्यमंत्री, केंद्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी नीति आयोग के अध्यक्ष हैं।

पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचों के खिलाफ चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद यह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी की पहली बड़ी बैठक है।

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सत्यपाल मलिक के खिलाफ CBI की चार्जशीट, संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला http://lucknowfocus.com/sanjay-singh-attack-modi-government-on-former-governor-hospitalized-against-satyapal-malik/ Thu, 22 May 2025 15:27:19 +0000 https://lucknowfocus.com/?p=3885 Lucknow Focus News Desk: सीबीआई ने किरू जलविद्युत परियोजना में 2,200 करोड़ रुपये के ठेके में कथित भ्रष्टाचार के मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक और सात अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

संजय सिंह ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “मोदी सरकार निर्दयी है। एक तरफ सत्यपाल मलिक अस्पताल में भर्ती हैं और जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं, दूसरी तरफ CBI ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।”

तीन साल चली जांच, कई नाम शामिल

CBI ने तीन साल की जांच के बाद मलिक और उनके दो सहयोगियों—वीरेंद्र राणा और कंवर सिंह राणा—को आरोपी बनाया है। इसके साथ ही चार्जशीट में चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CVPPPL) के तत्कालीन एमडी एम.एस. बाबू, निदेशक अरुण कुमार मिश्रा और एम.के. मित्तल, पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के एमडी रूपेन पटेल और कंवलजीत सिंह दुग्गल के नाम भी शामिल हैं।

सत्यपाल मलिक ने क्या कहा?

चार्जशीट दाखिल होने के दिन, 22 मई को सत्यपाल मलिक ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वह अस्पताल में भर्ती हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें शुभचिंतकों के फोन आ रहे हैं, लेकिन वे जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।

क्या है मामला?

CBI ने 2022 में प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के सिविल कार्यों के लिए 2,200 करोड़ रुपये का ठेका एक निजी कंपनी को देने में अनियमितता हुई थी। मलिक ने खुद दावा किया था कि उन्हें परियोजना की एक फाइल को मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की गई थी।

CBI ने फरवरी 2024 में इस मामले में सत्यपाल मलिक समेत अन्य के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। मलिक ने तब कहा था कि उन्हें बदले की भावना से निशाना बनाया जा रहा है।

“मेरे पास चार-पांच कुर्ते-पायजामा के अलावा कुछ नहीं है। तानाशाह सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर मुझे डराना चाहती है, लेकिन मैं किसान का बेटा हूं, न डरूंगा, न झुकूंगा,” मलिक ने उस समय अपने बयान में कहा था।

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