जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गूंजे वीर रस के स्वर, कवियों ने किया भारतीय सेना को नमन

Lucknow Focus News Desk : जय नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखनऊ में आज ‘निशंक सांस्कृतिक क्लब’ के तत्वावधान में भारतीय सेना की वीरता को समर्पित एक भव्य कवि सम्मेलन ‘शौर्याञ्जलि’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हाल ही में सफल हुए ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ की उपलब्धियों और भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस को सम्मान देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम स्थल और संचालन
कवि सम्मेलन का आयोजन महाविद्यालय के नवीन भवन स्थित सभागार में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विनोद चन्द्र ने की। सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवि धीरज मिश्र द्वारा सरस्वती वंदना के मधुर स्वर से हुई। इसके बाद मंच पर एक से बढ़कर एक कवियों ने अपने काव्यपाठ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
सोमनाथ कश्यप ने अपनी पंक्तियों
“सत्य सिद्धांत पर जब अटल हो गए,
कुछ स्वजन तब विरोधी प्रबल हो गए…”
से उद्घाटन किया और शौर्य की भावना को शब्दों में पिरोया।
आदर्श सिंह ‘निखिल’ और अमर नाथ ललित की ओजस्वी कविताओं ने देशभक्ति की भावना को ऊंचाई दी और सभागार में उत्साह का संचार कर दिया।
सम्मेलन के अंत में प्रो. बलवन्त सिंह के गीत
“वो घर में भी तो हो ठीक सकता था,
अपने कचहरी में जो समझौता हुआ है…”
ने श्रोताओं को गहराई से छू लिया।
सम्मान समारोह भी रहा विशेष आकर्षण
इस अवसर पर महाविद्यालय से पिछले सत्र में सेवानिवृत्त हुए प्रो. सरिता चौहान, सन्निवेश मिश्र का सम्मान भी किया गया। प्राचार्य प्रो. विनोद चन्द्र ने उन्हें शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके योगदान को नमन किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव रहा, बल्कि भारतीय सेना के प्रति कृतज्ञता और सम्मान की गूंज भी बन गया।
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