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‘दुनिया में अब कोई एक ‘सुपरपावर’ नहीं, वर्चस्व का दौर हुआ खत्म’, एस. जयशंकर का बड़ा बयान

Lucknow Focus News Desk: रायसीना डायलॉग 2026 को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था पर गहरा विश्लेषण पेश किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में किसी भी एक देश का पूरी दुनिया पर ‘एकछत्र राज’ (Hegemony) होना नामुमकिन है। जयशंकर के मुताबिक, दुनिया अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुकी है जहाँ ताकत किसी एक केंद्र में नहीं, बल्कि कई हिस्सों में बंटी हुई है।

पुरानी उम्मीदें अवास्तविक थीं

जयशंकर ने पिछले सात दशकों के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1945 (द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति) या 1989 (शीत युद्ध का अंत) के बाद जो विश्व व्यवस्था बनी, उसे हमेशा के लिए स्थिर मान लेना एक बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा “अगर हम भारत के हजारों साल के इतिहास को देखें, तो पिछले 70-80 साल उसका एक बहुत छोटा हिस्सा हैं। इसलिए दुनिया का बदलना और पुरानी व्यवस्थाओं का टूटना बिल्कुल स्वाभाविक है।”

ताकत के बदल गए मायने: सिर्फ सेना और GDP काफी नहीं

विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के समय में ताकत का मतलब सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था (GDP) या बड़ी सेना होना नहीं रह गया है। दुनिया अब कई केंद्रों में बंट रही है। कोई देश कूटनीति में मजबूत है, तो कोई तकनीक में। कोई भी एक देश ऐसा नहीं है जो अर्थव्यवस्था, सेना, तकनीक और कूटनीति इन चारों क्षेत्रों में एक साथ पूरी तरह हावी हो।

उन्होंने कहा कि अक्सर वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अमेरिका के इर्द-गिर्द ही किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि शक्ति अब दुनिया के अलग-अलग कोनों में फैल चुकी है।

तकनीक और डेमोग्राफी

जयशंकर ने आने वाले दशक के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण कारकों (Factors) की पहचान की। जो देश नई तकनीक में आगे होगा, वही दुनिया की दिशा तय करेगा। किसी देश की आबादी का ढांचा और उसकी क्षमता वैश्विक राजनीति में बड़ा रोल निभाएगी।

विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट और यूरोप में युद्ध जैसे हालात हैं। उनका संदेश साफ है दुनिया अब किसी एक ‘सर्वोच्च ताकत’ के इशारे पर नहीं चलेगी, बल्कि सहयोग और विभिन्न शक्तियों के संतुलन से ही आगे बढ़ेगी।

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