लखनऊ

अमेठी जल बिरादरी की ‘जल साक्षरता युवा संवाद यात्रा’ का अंतिम पड़ाव छंदवल में संपन्न, नदियों के संरक्षण पर हुई सार्थक चर्चा

अमेठी जल बिरादरी के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय जल साक्षरता युवा संवाद यात्रा का अंतिम पड़ाव बाराबंकी जनपद के बनीकोडर ब्लॉक स्थित ग्राम छंदवल में सम्पन्न हुआ। इस यात्रा का समापन बेसिक उत्थान एवं ग्रामीण सेवा संस्थान द्वारा संचालित चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन बिरजू संस्थान के सहयोग से “हमारा लक्ष्य जल स्वराज से ग्राम स्वराज” विषय पर केंद्रित एक विचार गोष्ठी के रूप में हुआ।

गोष्ठी का शुभारंभ गांधी शांति प्रतिष्ठान के पूर्व निदेशक रमेश शर्मा, अवध भारती संस्थान के अध्यक्ष व अवधी आराधक डॉ. रामबहादुर मिसिर, अमेठी जल बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पांडे, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव पीएन प्रसाद,गंगा बचाओ अभियान के कार्यकर्ता व भोजपुरी कवि कृष्णानंद राय, पर्यावरणविद व कवि इं. सुनील बाजपेई, तथा डॉ. अभिमन्यु पांडे द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ।

मुख्य अतिथि रमेश शर्मा ने कहा कि “नदियां प्यासी हैं, उन्हें जीवित रखने के लिए नदियों और तालाबों की गहराई बढ़ानी होगी।” उन्होंने बताया कि ऊपरी क्षेत्रों से तेज बहाव के चलते सिल्ट और गाद मैदानी इलाकों में जमा होकर बाढ़ व सूखे का कारण बनते हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपनी प्रेरणादायक कविता “नदियां धीरे बहो, तेरी नहीं है किसी को परवाह…” के माध्यम से जनमानस को जागरूक किया।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राम बहादुर मिसिर ने भारतीय संस्कृति में जल संरक्षण की परंपराओं की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमारे पूर्वज जल स्रोतों की पूजा करते थे, और उन्हें दूषित करना पाप समझते थे। हमें फिर से उन्हीं परंपराओं को अपनाना होगा।”

नदियों के संरक्षण पर हुई सार्थक चर्चा

विशिष्ट अतिथि पीएन प्रसाद ने कहा कि नदियों व पोखरों को बचाने के लिए हमें उन्हें हमारी सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखना होगा। पर्यावरणविद इं. सुनील बाजपेई ने भूगर्भीय जल संरक्षण की आवश्यकता पर अपनी कविताओं के माध्यम से संदेश दिया।

डॉ. अर्जुन पांडे ने भूमंडलीकरण, नगरीकरण और औद्योगीकरण को जल संकट का मुख्य कारण बताया। उन्होंने “खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में और शहर का पानी शहर में” के सिद्धांत पर अमल करने की आवश्यकता जताई।

इस मौके पर अधिवक्ता व साहित्यकार इकबाल राही, रेडक्रॉस के चेयरमैन शैलेन्द्र सिंह ने भी विचार व्यक्त किए। गोष्ठी में प्रसिद्ध ओज कवि डॉ. अम्बरीश अम्बर, व्यंग्यकार डॉ. ओपी वर्मा ‘ओम’, हास्य कवि अनिल कुमार श्रीवास्तव ‘लल्लू’, और गीतकार साहब नारायण ने जल संरक्षण पर केंद्रित रचनाओं से श्रोताओं को प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन बिरजू संस्थान के अध्यक्ष व बाराबंकी जल बिरादरी के संयोजक रत्नेश कुमार ने किया। वहीं चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल के प्रधानाध्यापक विनोद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

स्कूल की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर शिक्षिकाएं वंदना वर्मा, शारदा रावत, पूनम रत्नाकर, सरिता यादव, अनिता, पलक, प्रिंसी वर्मा, स्टाफ से सरोज, सरस्वती, जियालाल, अवधेश कुमार, राम कैलाश, प्रताप नारायण, स्वामीनाथ रावत सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक, बच्चे एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।

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