लखनऊ

लखनऊ में कला का अनोखा प्रयोग: विश्व फोटोग्राफी दिवस पर मेट्रो ट्रेन बनेगी जीवंत फोटो कैनवास

Lucknow Focus News Desk: 19 अगस्त 2026 को लखनऊ मेट्रो में 40 फोटोग्राफरों के लिए फोटो वॉक कार्यशाला और हजरतगंज स्टेशन पर 2 दिवसीय प्रदर्शनी लगेगी । चलती मेट्रो में लाइव फोटो वॉक, मेंटर कुंवर द्वारा मार्गदर्शन और भूपेंद्र कुमार अस्थाना द्वारा क्यूरेशन। सार्वजनिक परिवहन और शहरी गतिशीलता को कलात्मक नजरिए से जोड़ना और आम दृश्यों को असाधारण फोटोग्राफिक फ्रेम्स में बदलना।

फोटोग्राफी केवल किसी क्षण को कैमरे में कैद करने की तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समय, प्रकाश, संवेदना और गति के भीतर छिपी कहानी को देखने का एक नजरिया है। इसी रचनात्मक दृष्टि को शहर की दैनिक गतिशीलता से जोड़ते हुए विश्व फोटोग्राफी दिवस (19 अगस्त 2026) के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अनूठा सांस्कृतिक और कलात्मक आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर लखनऊ मेट्रो न केवल यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाएगी, बल्कि स्वयं एक ‘चलती हुई कला प्रयोगशाला’ और जीवंत फोटो कैनवास के रूप में नजर आएगी।

आयोजन की प्रमुख गतिविधियां और कार्यशाला

चलती ट्रेन में ‘फोटो वॉक’ कार्यशाला: 19 अगस्त को लखनऊ मेट्रो के भीतर एक विशेष फोटो वॉक कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें शहर के 40 चयनित फोटोग्राफर हिस्सा लेंगे।

दो दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी: हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर दो दिनों की भव्य फोटोग्राफी प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जहां प्रतिभागी और विशेषज्ञ अपनी कृतियों को आम जनता के सामने प्रदर्शित करेंगे।

मुंशी पुलिया से एयरपोर्ट तक सर्वेक्षण: आयोजन को तकनीकी और कलात्मक रूप से सफल बनाने के लिए मुंशी पुलिया से चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन तक विस्तृत सर्वे किया गया। इस दौरान मेट्रो के प्लेटफॉर्म, कॉरिडोर, यात्रियों की सहज गतिविधियों और ट्रेन की खिड़कियों से दिखाई देने वाले शहरी परिदृश्यों का फोटोग्राफी के दृष्टिकोण से खाका तैयार किया गया।

प्रमुख व्यक्तित्व और अवधारणा

क्यूरेशन एवं संकल्पना (भूपेंद्र कुमार अस्थाना): प्रदेश के प्रसिद्ध चित्रकार एवं कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना इस अभिनव आयोजन के क्यूरेटर हैं। उनकी संकल्पना कला को पारंपरिक आर्ट गैलरी की चारदीवारी से बाहर निकालकर सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचाने की है। उनका मानना है कि शहर को समझने के लिए कैमरे से ज्यादा एक संवेदनशील आंख की जरूरत होती है।

मेंटरशिप (युवा फोटोग्राफर कुंवर): कार्यशाला में मेंटर के रूप में युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कुंवर प्रतिभागियों को प्रकाश-छाया (Light & Shadow), फ्रेमिंग, कंपोजिशन, और स्ट्रीट व डॉक्यूमेंट्री फोटोग्राफी के व्यावहारिक टिप्स देंगे।

आयोजन टीम: सर्वेक्षण टीम में क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना, मेंटर कुंवर और लखनऊ मेट्रो के फोटोग्राफर सौरभ शामिल रहे।

इस पहल का मूल उद्देश्य और संदेश

संवेदना का विकास: आम और साधारण दृश्यों को असाधारण फोटोग्राफिक फ्रेम में बदलना।

सार्वजनिक कला (Public Art): यह संदेश देना कि कला केवल स्थिर संग्रहालयों तक सीमित नहीं है-जहाँ जीवन और गति है, वहीं कला का जन्म होता है।

शहरी जीवन का दस्तावेजीकरण: लखनऊ मेट्रो, जो शहर की आधुनिक रफ्तार का प्रतीक है, के माध्यम से बदलते लखनऊ, उसकी वास्तुकला और लोगों की जीवनशैली को कैमरे के माध्यम से दर्ज करना।

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