90 दिन में फैटी लिवर को करें ‘रीसेट’, विशेषज्ञ ने बताए डाइट और लाइफस्टाइल से ठीक करने के तरीके

Lucknow Focus News Desk: फैटी लिवर की समस्या, जिससे देश में लगभग 35 से 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित है, आजकल की खराब जीवनशैली के कारण तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का मानना है कि सही आहार और जीवनशैली में बदलाव लाकर, लिवर में जमा अतिरिक्त फैट को कम किया जा सकता है, जिससे लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा टल सकता है।
फैटी लिवर को ठीक करने के लिए मुख्य उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर की स्थिति में सुधार लाने के लिए 90 दिनों के भीतर डाइट और व्यायाम पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।
- आहार: प्लांट बेस्ड और मेडिटेरेनियन डाइट
प्लांट बेस्ड आहार: सामान्य तौर पर, आहार जितना अधिक पौधों पर आधारित होगा, लिवर के लिए उतना ही बेहतर होगा। यह इंसुलिन के कार्य को बेहतर बनाने और वजन घटाने में मदद करता है।
मेडिटेरेनियन डाइट: विशेषज्ञों ने फैटी लिवर से बचने और उसे ठीक करने के लिए मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने की सलाह दी है। यह आहार हेल्दी फैट्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और जटिल कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो लिवर में फैट कम करने में सहायक है।
परामर्श अनिवार्य: चूंकि प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए अपने लिए सही आहार योजना बनाने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
- इन खाद्य पदार्थों से बनाएं दूरी
लिवर में फैट जमा करने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना सबसे महत्वपूर्ण है:
- एंटीऑक्सिडेंट और लिवर सप्लीमेंट्स
कुछ यौगिक और एंटीऑक्सिडेंट कोशिकाओं को क्षति से बचाकर फैट जमा होने से रोक सकते हैं। इन्हें आहार में शामिल करें:
पेय पदार्थ: कॉफी, ग्रीन टी
फल और सब्जियाँ: फल (खासकर बेरीज़), कच्चा लहसुन, अन्य सब्जियां
स्वस्थ वसा: जैतून या कैनोला तेल जैसे मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स, सूरजमुखी के बीज, बादाम
सप्लीमेंट्स: विटामिन ई
- व्यायाम: एरोबिक और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
नियमित शारीरिक गतिविधि सीधे तौर पर लिवर में फैट की मात्रा को कम कर सकती है और सूजन को भी नियंत्रित करती है।
एरोबिक व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 5 दिन 30 से 60 मिनट या उससे अधिक मध्यम से तेज गति की एरोबिक एक्सरसाइज करें।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे व्यायाम भी फैटी लिवर रोग में सुधार कर सकते हैं।
डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए डायबिटीज (रक्त शर्करा), कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स (खून में वसा) को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएँ नियमित रूप से लें और अपने ब्लड शुगर तथा वसा के स्तर पर कड़ी नजर रखें।




