आरंभ से ही रहा है लखनऊ कला महाविद्यालय का गौरवशाली महत्व -जय कृष्ण अग्रवाल


मूर्तिकार सैयद अफसर मदद नकवी को जयंती पर याद किया
लखनऊ फोकस न्यूज
लखनऊ। शुक्रवार को सप्रेम संस्थान द्वारा कलाकार स्मृति श्रृंखला में 20वीं सदी के प्रमुख मूर्तिकार सैयद अफसर मदद नकवी के 90वीं जयंती पर याद किया गया। नक़वी का संबंध लखनऊ कला महाविद्यालय से 1960 से रहा, जब वे इस महाविद्यालय के छात्र रहे। 1962 में वह पाकिस्तान चले गए थे।
वरिष्ठ कलाकार जय कृष्ण अग्रवाल ने उन्हे याद करते हुए कहा कि नकवी हमवतन होने के साथ-साथ मेरे अच्छे मित्र भी रहे थे। सरहद के पार जाने के उपरांत भी वह अपनी जमीन को भुला न सके..। कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ का इतिहास शुरू से ही समृद्ध रहा है। महाविद्यालय के गौरव और महत्व को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर शुरुआत से ही बड़ा महत्व दिया गया। और दिया भी क्यों न जाय, क्योंकि इसका विस्तार तो आरंभ से ही देशीय सीमा लांघ चुका था। इस महाविद्यालय से न जाने कितने ही अनगिनत कला के रत्न निकले और वे इस महाविद्यालय की सुंदर क्षवि को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ले गए और आज भी इस महाविद्यालय के नाम को ऊंचा कर रहे हैं। आज भले ही हम इस महाविद्यालय के अस्तित्व को नहीं बचा पा रहे हैं लेकिन कल अगर कला इतिहास को लिखा जाएगा तो इस महाविद्यालय के योगदान और यहाँ के कलाकारों का नाम स्वर्ण अक्षरों में अवश्य दर्ज किया जाएगा। महाविद्यालय ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका कला मे दिया है अब यह ज़िम्मेदारी हम कलाकारों की अवश्य बनती है की उसके योगदान को भूलने न दें और उसकी क्षवि और अस्तित्व को धूमिल के बजाय उसे सवारने मे भूमिका निभाए और महाविद्यालय के प्रति अपनी क्षमता अनुसार बचाने में कोशिश करें।




