9 लाख करोड़ के तेल आयात पर ब्रेक लगाएगी पतंजलि! मलेशिया से हुई बड़ी डील, जानिए भारत को कैसे मिलेगा फायदा

Lucknow Focus News Desk: भारत का आयात बिल अब सिर्फ कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) या सोने तक सीमित नहीं रहा—एक और बड़ा खर्च खाद्य तेल (एडिबल ऑयल) पर होता है, जिसकी घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत को भारी मात्रा में विदेशों से आयात करना पड़ता है। ताजा अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का खाद्य तेल आयात बिल करीब 104 अरब डॉलर (यानि लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए पतंजलि ने एक बड़ा कदम उठाया है।
पतंजलि की मलेशिया के साथ रणनीतिक साझेदारी
देश की जानी-मानी FMCG कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने मलेशिया सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण करार किया है। इस समझौते के तहत, मलेशिया से पाम ऑयल के बीज आयात कर भारत में बड़े पैमाने पर स्थानीय उत्पादन शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल खाद्य तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना है, बल्कि विदेशी निर्भरता को कम करना भी है।
पतंजलि की यह योजना भारत के बढ़ते खाद्य तेल आयात बिल को लंबी अवधि में काफी हद तक घटाने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास माना जा रहा है।
भारत क्यों करता है इतना एडिबल ऑयल आयात?
हालांकि भारत खाद्य तेल के उत्पादन में भी प्रयासरत है, लेकिन घरेलू खपत इतनी अधिक है कि उसे पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात करना अनिवार्य हो गया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है।
- वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 96.1 अरब डॉलर से अधिक का एडिबल ऑयल आयात किया था।
- वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 104 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
- अनुमान है कि इस साल भारत 16.23 मिलियन मीट्रिक टन खाद्य तेल आयात करेगा।
पतंजलि का प्लान: आयात घटाएं, उत्पादन बढ़ाएं
पतंजलि की रणनीति सीधी है बीज मलेशिया से लाएं और भारत में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ाएं। इससे न केवल भारत की खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और खेती के विकल्प भी बढ़ेंगे। इस डील से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार की नजर भी इस क्षेत्र पर
भारत सरकार भी इस दिशा में पहले से काम कर रही है और खाद्य तेल आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार कर रही है। पतंजलि का यह कदम उस प्रयास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करता है।
पतंजलि की यह पहल यदि सफल होती है, तो भारत न केवल खाद्य तेल के आयात पर लगाम लगाएगा, बल्कि किसानों को नई फसल विकल्पों और स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए आमदनी बढ़ाने का भी अवसर मिलेगा।
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