उत्तर प्रदेश

जेपी नड्डा की लखनऊ यात्रा से क्यों डरे हैं कुछ भाजपा नेता? क्या होंगे दूरगामी परिणाम?


JANUARY 21, 2021
लखनऊ फोकस ब्यूरो
लखनऊ (UP Politics)। भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) आज लखनऊ आ रहे हैं। उनका लखनऊ प्रवास काफी दिनों से प्रतीक्षित था। उनके स्वागत की अच्छी तैयारियां की गई हैं। वैसे तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आना हर्ष का विषय होता है लेकिन इस यात्रा से कई भाजपा नेता डरे हुए भी हैं। उनके डरने के वाजिब कारण भी हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा बृहस्पतिवार को लखनऊ दौरे पर आ रहे हैं। वह यहां संगठन के लोगों के साथ कई राउंड बैठक करेंगे। उनके दौरे के मद्देनजर पार्टी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल पूरी तैयारियों को कई बार ठोक-बजाकर देख चुके हैं। ये लोग नहीं चाहते कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने किसी स्तर पर प्रदेश यूनिट की किरकिरी हो।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार जेपी नड्डा वार्ड, मंडल, क्षेत्र पदाधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे। वह देखेंगे कि एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का संगठन कितना तैयार है? वह यहां से मिले फीडबैक और उसके साथ ही साथ अपने आकलन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को अवगत कराएंगे। वह संगठन के सर्वोच्च पदाधिकारी हैं, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditya Nath) के साथ भी गंभीर विचार-विमर्श करेंगे। उनका जोर पार्टी और सरकार (Yogi Government) के बीच बेहतर सामंजस्य बिठाने पर होगा।
पार्टी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन से कई पार्टी नेता बेहद डरे हुए हैं। इनमें योगी सरकार के कुछ मंत्री भी हैं, जिन्हें आगामी मंत्रिपरिषद फेरबदल में निश्चित तौर पर हटा दिया जाना है। इन मंत्रियों को हटाने के दो मानदंड बनाए गए हैं। पहला, वे मंत्री जो बेहद सुस्त हैं और मंत्री के तौर पर बेहतर रिजल्ट नहीं दे पा रहे हैं। दूसरा, वे मंत्री जिनके साथ कोई न कोई विवाद जुड़ा है। ये सभी मंत्री बेहद डरे हैं। हालांकि इनमें राज्य मंत्रियों की संख्या ज्यादा है। कुछ राज्य मंत्री सचमुच ऐसे हैं, जो एकदम नाकारा साबित हुए हैं और जिनकी सुस्ती के चलते सरकार की छवि धूमिल हो रही है। दूसरे, ऐसे मंत्री भी हैं, जिनके या जिनके परिवारीजनों की चलते सरकार की भद्द पिटी है या भद्द पिटने से किसी तरह बचाया जा सका है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जेपी नड्डा बैठक में नेताओं से फीडबैक लेंगे कि अगर इन्हें पद से हटा दिया गया तो उसका क्या सकारात्मक या नकारात्मक असर पड़ेगा? बताते हैं कि पार्टी आलाकमाल इन्हें झेलने के मूड में एकदम नहीं है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी के संगठन के एक बड़े नेता पर भी गाज गिर सकती है। इन पर आरोप है कि यह संगठन में बेहद महत्वपूर्ण पद पर होते हुए भी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद नहीं रखते। जिलों के दौरों पर जाते हैं तो वहां भी खुले में कार्यकर्ताओं से मिलने के बजाय बंद कमरों में पार्टी के चुनिंदा पदाधिकारियों से मिलकर वापस लखनऊ आ जाते हैं। इस बड़े नेता पर अगर गाज गिरती है तो यह संगठन में एक बड़ा परिवर्तन होगा। इन नेता के समर्थकों में काफी निराशा है। लेकिन सूत्रों के अनुसार इन्हें बचाने के लिए दिल्ली में एक मजबूत लॉबी है। दूसरी तरफ इनके ऊपर परोक्ष रूप से आरएसएस का भी वरदहस्त है। हालांकि आरएसएस की तरफ से भी कई बार इनके प्रति नाराजगी जाहिर की जा चुकी है। इसके अलावा लखनऊ से इनकी कई शिकायतें दिल्ली भेजी गई हैं। बताते हैं कि इन शिकायतों में कहा गया है कि अगर ये पदाधिकारी अपने पद पर बरकरार रहे तो पार्टी के लिए अगला विधानसभा चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा संगठन में कुछ नए लोगों के समायोजन पर भी विचार किया जाना है, जिस पर नड्डा को अंतिम मुहर लगानी है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी को यह जानकारी भी है कि पार्टी के कई विधायक बहुत नाराज हैं और वे अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यही कारण है कि विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने 11वां प्रत्याशी नहीं खड़ा किया। ऐसा करने पर विधायक अगर दूसरे दल के उम्मीदवार को जिता देते, तो पार्टी की अंदरूनी कलह सतह पर आ जाती, जिसे झेलना बड़ा मुश्किल होता। ऐसे में नड्डा को यह देखना है कि इन विधायकों के स्थान पर किसे टिकट दिया जाए, जो पार्टी की नैया को पार लगा दे। ऐसे नामों की लिस्ट बनाई गई है। यह विधानसभावार है। दरअसल, भाजपा हाईकमान किसी भी सूरत में इन असंतुष्ट विधायकों को दुबारा विधानसभा टिकट नहीं देना चाहता। नड्डा के लखनऊ प्रवास के दौरान काफी हद तक यह तय हो जाएगा कि किन-किन को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलना है। टिकट काटने के बाद किसे दिया जाए, यह तय करना अभी पार्टी की प्राथमिकता में नहीं है। किसे टिकट देना है, यह फिलहाल बाद में तय किया जाएगा। अभी केवल यह बताना है कि संगठन के पास संबंधित विधानसभा में वैकल्पिक नाम कौन-कौन से हैं?
नड्डा को यह भी देखना है कि कुछ ऐसे वरिष्ठ नेता जिन्हें विधान परिषद में समायोजित करने का आश्वासन दिया गया था, पर नहीं किया जा सका, उन्हें कहां एडजस्ट किया जा सकता है?
संगठन की ओवरहालिंग पर भी विचार किया जा सकता है। ऐसे में कई महत्वपूर्ण नेताओं को हटाकर नए लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके लिए नेताओं ने अपनी-अपनी गोटें बिछानी शुरू कर दी है। इस महीने की शुरुआत में नए वर्ष की बधाई देने के बहाने प्रदेश स्तरीय कई नेता दिल्ली में जाकर जेपी नड्डा से मिल आए हैं। इसमें कई नेता लखनऊ के हैं। इनमें कुछ की पैठ केवल लखनऊ में है लेकिन इनका दावा है कि वे प्रदेश स्तर के नेता हैं। सूत्र कहते हैं कि प्रदेश के जो नेता महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां लेने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं, उनकी हैसियत और जनता में स्वीकार्यता के बारे में जेपी नड्डा ने अपने सूत्रों से भी एक अध्ययन करवाया है।

सूत्रों के अनुसार, इन सभी मुद्दों पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विचार-विमर्श करके उनकी भी राय लेंगे। उन्हें लखनऊ से जो रिपोर्ट मिली है, वह यह है कि दिल्ली में प्रधानमंत्री के खासमखास रहे पूर्व आईएएस आफिसर अरविंद कुमार शर्मा के लखनऊ आने से उनके और योगी के संबंधों को लेकर कुछ गलतफहमियां भी पैदा हो गई हैं। नड्डा का मकसद इस गलतफहमी को दूर करना भी है, क्योंकि वह प्रदेश में अपने सबसे बड़े फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकते। इसके साथ ही नड्डा अरविंद कुमार शर्मा की आगामी भूमिका भी तय करेंगे। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाना है या मंत्री, इस बारे में वह योगी आदित्यनाथ को जरूरी निर्देश देंगे। वह अन्य मंत्रियों के नामों पर भी मुहर लगा सकते हैं, जिन्हें अगले मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल करना है। इसके बाद ही प्रदेश मंत्रिमंडल के अगले विस्तार की तारीख तय होगी।
कुल मिलाकर नड्डा का यह दौरा प्रदेश भाजपा के आने वाले भविष्य की दिशा का निर्धारण करेगा। ऐसे में कुछ नेताओं का डरना स्वाभाविक है। (फोटो-सौजन्य : सोशल मीडिया )

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