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पहलगाम हमले के बाद सेंधा नमक पर मंडराया संकट, पाकिस्तान से सप्लाई पर असर संभव

हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है। इस बदले हुए माहौल का असर अब व्यापारिक रिश्तों पर भी नजर आने लगा है। पाकिस्तान ने भारत के साथ व्यापारिक गतिविधियों को रोकने की बात कही है, जिसका सीधा असर उस खास वस्तु पर पड़ सकता है जो भारत में पूजा-पाठ और उपवास के दौरान अत्यधिक उपयोग की जाती है — सेंधा नमक।

भारत में सेंधा नमक का उत्पादन नगण्य है, जिसकी वजह से इसके आयात के लिए भारत को दूसरे देशों, विशेषकर पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित खेवड़ा नमक खदान दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी रॉक सॉल्ट खदानों में गिनी जाती है। इस खदान की उम्र करीब 2000 साल बताई जाती है और यहां से सालाना करीब 4.5 लाख टन सेंधा नमक का उत्पादन होता है।

भारत में बढ़ती मांग, कीमतें आसमान पर

जहां पाकिस्तान में सेंधा नमक की कीमत मात्र 2 से 3 रुपए प्रति किलो है, वहीं भारत में यही नमक 50 से 60 रुपए किलो तक बिकता है। खासतौर पर व्रत, नवरात्र, महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी जैसे त्योहारों के दौरान इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है। भारत में इसे शुद्ध और सात्विक माना जाता है, इसलिए यह आम नमक की जगह इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि बीते कुछ वर्षों में भारत ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात विविधता लाने के प्रयास किए हैं। वर्तमान में भारत मलेशिया, ईरान समेत कुछ अन्य देशों से भी सेंधा नमक आयात करता है। लेकिन खेवड़ा खदान के नमक जैसी गुणवत्ता और मात्रा अब भी अन्य देशों से मिलना चुनौतीपूर्ण है।

क्या होगा आगे?

अगर भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापार पूरी तरह से बंद होता है, तो सेंधा नमक की घरेलू कीमतों में और इजाफा हो सकता है। साथ ही, भारत को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं पर तेजी से भरोसा करना होगा, जिससे त्योहारों और धार्मिक अवसरों पर इसकी मांग पूरी की जा सके।

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