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7000 करोड़ रुपये की Airtel-Tata DTH मर्जर डील रद्द, आखिर क्यों नहीं हो पाया विलय?

भारत की दो प्रमुख डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवा प्रदाता कंपनियों, भारती एयरटेल और टाटा ग्रुप, के बीच चल रही ₹7,000 करोड़ की मर्जर डील की बातचीत अचानक समाप्त हो गई है। दोनों कंपनियों ने आपसी सहमति से इस डील को रद्द करने का फैसला लिया है, जो DTH क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने वाली थी।

डील का प्रारूप कैसा था?

फरवरी 2025 में एयरटेल और टाटा ग्रुप ने अपने घाटे में चल रहे DTH कारोबारों—Airtel Digital TV और Tata Play—के विलय की योजना की घोषणा की थी। यह विलय एक शेयर स्वैप मॉडल के तहत होना था, जिससे एयरटेल को मोबाइल सेवाओं के अतिरिक्त एक मजबूत राजस्व स्रोत मिल सकता था। इस मर्जर के बाद एयरटेल को विलय की गई इकाई में 50% से अधिक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद थी। यह डिश टीवी और वीडियोकॉन d2H के 2016 के विलय के बाद DTH सेक्टर की सबसे बड़ी डील मानी जा रही थी।

अचानक क्यों टूट गई डील?

Airtel की ओर से शेयर बाजार को दी गई सूचना के अनुसार, दोनों पक्ष किसी “संतोषजनक समाधान” पर नहीं पहुँच सके। डील को लेकर विभिन्न स्तरों पर मतभेद बने रहे, जिसके चलते इसे आपसी सहमति से समाप्त कर दिया गया। इसके पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं।

प्रबंधन नियंत्रण में टकराव: टाटा ग्रुप विलय के बाद बनी इकाई के बोर्ड में दो सीटें चाहता था, जबकि एयरटेल शीर्ष प्रबंधन पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता था।

वित्तीय असहमति: दोनों कंपनियों के DTH कारोबार का मूल्य ₹6,000 से ₹7,000 करोड़ के बीच आंका गया, लेकिन हिस्सेदारी और मूल्य निर्धारण को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

बदलता बाजार परिदृश्य: ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता बढ़ने से पारंपरिक DTH सेवाओं की मांग में गिरावट आई है। ऐसे में भविष्य की रणनीति को लेकर दोनों कंपनियों की सोच में भी अंतर दिखा।

अब आगे क्या?

मर्जर के रद्द हो जाने के बाद अब Airtel और Tata को अपने-अपने DTH ऑपरेशंस को स्वतंत्र रूप से जारी रखना होगा। तेजी से बदलते डिजिटल कंटेंट बाजार में, जहां ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का दबदबा बढ़ रहा है, दोनों कंपनियों को अपनी रणनीति और बिज़नेस मॉडल पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

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