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गर्भवती महिलाओं के लिए बड़ा खतरा है एनीमिया, सिर्फ 22% ही पूरी करती हैं इलाज

Lucknow Focus News Desk: एनीमिया, यानी शरीर में खून की कमी, गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा है। हाल ही में लखनऊ की 28 वर्षीय समीरा ने इसी स्थिति में एक बच्ची को जन्म दिया।

राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएल) में उनका हीमोग्लोबिन 5 से भी नीचे पहुंच गया था, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर इलाज कर मां और बच्चे दोनों की जान बचा ली। समीरा की कहानी तो सुखद रही, पर यह लाखों गर्भवती महिलाओं के सामने खड़ी एक बड़ी समस्या की तरफ इशारा करती है।

एनीमिया से जूझ रही गर्भवती महिलाओं में अक्सर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसका सीधा असर उनके और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इससे समय से पहले प्रसव, कम वजन वाले बच्चे का जन्म और डिलीवरी के दौरान ज्यादा खून बहने जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

सरकार के प्रयास, लेकिन चुनौतियां बरकरार
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस समस्या से लड़ने के लिए कई कदम उठाए हैं। पौष्टिक आहार को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां भी बांटी जा रही हैं। इसके बावजूद, अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं।

आरएमएल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मालविका मिश्रा के अनुसार, बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं को अपनी स्थिति का पता तब चलता है जब मुश्किलें बढ़ चुकी होती हैं। समय पर जाँच न होने से इलाज और भी मुश्किल हो जाता है।

आंकड़े चिंताजनक, जागरूकता की कमी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में 15-49 वर्ष की 45.9% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। सरकार द्वारा मुफ्त में आयरन-फोलिक एसिड (IFA) गोलियां देने के बावजूद, इसका इस्तेमाल बेहद कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 22.3% गर्भवती महिलाएं ही 100 दिनों तक इन गोलियों का सेवन करती हैं, जबकि केवल 9.7% महिलाएं ही 180 दिनों का पूरा कोर्स करती हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल का कहना है कि सरकार मातृ स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। यदि गर्भावस्था में एनीमिया का जल्दी पता चल जाए तो इसे आसानी से संभाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर गर्भवती महिला को शुरुआती चरण से ही अपनी जांच करानी चाहिए और परिवार को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि महिला को गर्भधारण से पहले ही पौष्टिक आहार मिले और प्रसव पूर्व जांच के लिए पति उसके साथ अस्पताल जाए। साथ ही, दोबारा गर्भधारण को रोकने के लिए दंपति को परिवार नियोजन के सही साधन अपनाने चाहिए। इस तरह हर स्तर पर कोशिश करने से ही मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर हो पाएगा।

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