क्या कांग्रेस की तरफ लौट रहे हैं मुस्लिम ?
आजम खां की पत्नी तंजीन फातिमा के बयान के बाद उठी राजनीतिक हलकों में बहस

समीना खान
‘पिछले दिनों सीतापुर जेल में बंद वरिष्ठ सपा पत्नी पूर्व सांसद तंजीन फातिमा ने आजम की रिहाई के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में कहा- ‘उन्हें अब किसी से कोई उम्मीद नहीं है। उम्मीद है तो केवल अल्लाह से। दूसरी तरफ, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने यह कहकर तंजीन फातिमा के बयान की तस्दीक कर दी कि मैं उनसे सहमत हूं। आजम खान पर गलत मुकदमे लगाकर उन्हें जेल में बंद किया गया है । अब तीन ही सूरत में वह जेल से बाहर आ सकते हैं- पहली, प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आए, दूसरी उन्हें कोर्ट से न्याय मिले और तीसरा उन्हें भगवान न्याय दें।
तंजीन फातिमा का यह बयान उनके समाजवादी पार्टी से मोहभंग के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीति के एक जानकार बताते हैं कि अखिलेश यादव ने आजम खान को पूरी तरह बिसराकर अपना सारा ध्यान पीडीए की राजनीति पर लगा रखा है। उन्हें जिस तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में अच्छी सफलता मिली है, उससे उत्साहित होकर वह मुस्लिमों पर अपनी राजनीति केंद्रित न करके पीडीए का समीकरण साधकर 2027 के विधानसभा चुनाव का किला फतह करना चाह रहे हैं।
अखिलेश यादव का राजनीतिक आकलन और रणनीति अपने स्थान पर सही हो सकती हैं लेकिन उन्होंने आजम खान को जिस तरह दरकिनार किया है, उससे मुस्लिम समुदाय में घोर निराशा है। मुस्लिम समाज अभी तक एकजुट होकर सपा को वोट देता आया है लेकिन आजम खान के प्रकरण के बाद से
पुरानी पार्टी कांग्रेस की तरफ देखने लगा है। उस कांग्रेस की तरफ, जिसकी छत्रछाया में उसने आजादी के बाद से आज तक अपने को महफूज महसूस किया है । दूसरी तरफ, भाजपा जिस तरह हिंदू-मुस्लिम के मुद्दे को उछालकर हिंदुओं के थोक वोट हासिल कर रही है और जिस तरह कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार भाजपा पर हमलावर हैं, उससे भी मुसलमानों के एक बड़े तबके को लग रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर अगर भाजपा को कोई पार्टी चुनौती दे सकती है तो वह कांग्रेस ही है। ऐसे में क्यों न कांग्रेस की तरफ ही चला जाए? दूसरे शब्दों में कहें तो मुसलमान अपने मूल की तरफ लौटना चाह रहा है।
सीबीएसई बोर्ड के एक स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी साहित्य पढ़ाने वाले सलमान ख़याल सोशल होने के साथ मेल-जोल का एक अच्छा दायरा रखते हैं। अलीगंज निवासी सलमान ख़याल के सामने इन सवालों को रखा कि क्या वाक़ई मुस्लमान कांग्रेस की तरफ वापसी कर रहा है और आज़म खान प्रकरण से मुसलमानों का सपा से मोह भंग हुआ है ? सलमान का जवाब था कि मुस्लिम समुदाय उतना पिछड़ा भी नहीं है जितना अमूमन समझा जाता है। आगे वह कहते हैं कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि एक बड़ा पढ़ा-लिखा तबका कांग्रेस के शासन में अपना भविष्य तलाश रहा है।
सलमान इस बात का इक़रार करते हैं कि एक दौर था जब मुस्लमान आंख बंद करके कांग्रेस को वोट दिया करता था। मगर अब वह मानते हैं कि मुस्लिम वोटर की अपनी चॉइस है। सलमान इस बात को एक अच्छा संकेत मानते हैं कि इस दौर का मुसलमान किसी एक पार्टी को बिना सोचे विचारे सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। मौजूदा सियासी तब्दीलियों के हवाले से सपा से मुसलमानों के मोहभंग पर सलमान का कहना है कि बेशक तमाम बदलाव हुए हैं मगर इन तब्दीलियों से ऐसा कुछ स्पष्ट नहीं होता कि मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी से दामन छुड़ाने की तैय्यारी कर ली है।
डॉ. सीमा जावेद ने अपने करियर की शुरुआत लखनऊ के सेन्ट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट से की थी । कुछ वर्ष पत्रकारिता की दुनिया में रहने के बाद उन्होंने एक बार फिर से एकेडमिक और रिसर्च की की तरफ वापसी की। वर्तमान में वह क्लाइमेट साइंटिस्ट के तौर पर काम कर रही हैं। मौसम के मिज़ाज पर पैनी निगाह रखने वाली डॉक्टर सीमा जावेद को राजनीतिक उतार- चढ़ाव की खासी पकड़ है। मुसलमानों का समाजवादी
न तो मुस्लमान सपा से किनाराकशी कर रहा है और न ही कांग्रेस की तरफ लौट रहा है। दोनों ही बातें सिरे से गलत हैं।
-राजेंद्र चौधरी, प्रवक्ता, समाजवादी पार्टी
पार्टी से मोहभंग होने और कांग्रेस के खेमे में कूच करने के सवाल पर उनका जवाब एक तीसरा एंगिल सामने लाता है। डॉक्टर सीमा जावेद का मानना है कि अपने सूबे में मुस्लिम वोट में शिया और सुन्नी का डिवीजन हमेशा से रहा है और इस सोच के हवाले से यहां के हालात में कोई ज्यादा बड़ा बदलाव उनको महसूस नहीं हुआ है। इस बंटवारे से इतर वह राहुल और अखिलेश के गठजोड़ को मौजूदा सियासत का सबसे प्रभावी फैक्टर मानती हैं। उनका कहना है कि राहुल और अखिलेश का साथ मुसलामानों को एकजुट करने की बड़ी वजह है और यहाँ पर मुसलमान आज़म खान प्रकरण को इतनी अहमियत नहीं देगा जितनी इस गठबंधन को मिलेगी। उनके मुताबिक़, इन दोनों का सियासी गठजोड़ वह बड़ा फैक्टर होगा जो मुसलमानों को बड़ी तादाद में लेकर चलने में कामयाब होगा।

डॉक्टर सीमा, आज़म खान की गिरफ्तारी और उनसे जुड़े लोगों की दिलआज़ारी की बात करती हैं। इस मामले पर उनका कहना है कि ताज़ीन खान उनके परिवार और कुछ करीबी लोगों का दिल दुखना लाज़िमी है, जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है। “मुसलमान तो कांग्रेस का ही था!” ये त्वरित टिप्पणी अनवर मिर्ज़ा ने तब की, जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या मुसलमान कांग्रेस की तरफ लौट रहा है? टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े अनवर मिर्ज़ा पुराने लखनऊ के कटरा अबूतराब के रहने वाले हैं। करीब डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से अनवर इस ट्रेड से जुड़े हुए हैं। कोविड से पहले वह एक ऑफिस में बतौर इम्प्लॉई काम करते थे मगर जब महामारी फैली तो ऑफिस बंद हो गया और धीरे-धीरे उन्होंने अपने नेटवर्क को फैलाया और इसी कारोबार को जारी रखा। आज उनका अपना सेटअप है। अनवर का कहना है कि मुसलमान और कांग्रेस दोनों को ही एक दूसरे का साथ छोड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ा है मगर आज दोनों ने ही एक दूसरे की अहमियत को जान लिया है।
आज़म खान विवाद पर अनवर का स्पष्ट जवाब था कि कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियों ने मुसलमानों का हितैषी बनकर उन्हें सिर्फ वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया है मगर यह सब असल में खुद की हितैषी रही हैं। अनवर पूरे यक्क्रीन से कहते हैं कि सपा की इस हरकत से मुसलमानों की आंख खुली है और उन्हें कांग्रेस की क्रद्र हुई है। साथ ही वह यह भी कहते हैं कि कांग्रेस को भी इस बात का एहसास है कि इस मुल्क का मुसलमान ही उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकता है। अनवर यहां पर एक और बात जोड़ते हैं, वह यह कि कांग्रेस और मुसलमान का साथ किसी मजहबी या पसर्नल फायदे के लिए नहीं बल्कि पहले भी एक सेक्युलर राष्ट्र के लिए था और एक बार फिर से ऐसा ही होगा।

खालिद खान रिटायर्ड ऑफिसर हैं और दुबग्गा क्षेत्र में रहते हुए सामाजिक कार्यों में अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा व्यतीत करते हैं। मुसलमानों के कांग्रेस के खेमे में लौटने पर उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया कि सुबह का भूला शाम को घर लौट रहा है। हालांकि वह इसे गलत भी नहीं मानते। उनका कहना है कि हमारे पुरखों और नेहरू-इंदिरा वाली कांग्रेस के बीच एक अलग ही बॉन्डिंग थी। मुसलमान सुकून से अपनी नौकरी-धंधा करते थे और पांच बरस बाद जाकर कांग्रेस को वोट दे दिया करते थे। सब-कुछ सही सलामत चल रहा था। फिर वही बदलाव जो दुनिया में हमेशा से और हर मामले में होता आया है। मुसलमानों ने भी सपा का एतबार किया, उन्हें भर-भर वोट दिया मगर मुलायम सिंह तक तो फिर भी हालात बेहतर कह सकते हैं, लेकिन उनके बेटे में वह बातनहीं।
आने वाले समय में न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि देश में मुस्लिम कम्युनिटी एक स्ट्रांग पिलर बनकर वापस कांग्रेस के साथ ऐसे ही खड़ी होगी जैसे वह कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी के साथ खड़ी थी।
मनीष हिंदवी, प्रवक्ता, कांग्रेस
दूसरे सवाल के जवाब में खान साहब का कहना था कि आज़म खान केस हमारी पूरी कौम के सामने एक डेमो है। मुसलमानों को समझ आ रहा है कि जब अपने करीबियों की तरफ से अखिलेश किनारा कर सकते हैं तो फिर क़ौम के लिए उनसे उम्मीद रखें बेमानी होगा। उनके मुताबिक़ आज़म खान क्या किसी भी मुस्लमान की पैरवी करके अखिलेश हिन्दू वोटर की नाराज़गी मोल नहीं लेना चाहेंगे।

चिकन कपड़ों के कारोबारी मोहम्मद मतीन नक्खास इलाक़े में रहते हैं और चौक में इनका कारखाना है। मुसलमानों के कांग्रेस के खेमे में वापसी के सवाल पर मतीन का अंदाज़ बिलकुल जोशीला हो जाता है और पूरी खुशमिजाजी के साथ वह कहते हैं कि मुसलमान ही नहीं जानकार हिन्दू भी अब कांग्रेस की तरफ लौटता नज़र आ रहा है। मतीन आगे कहते हैं कि वह यह बात हवा में या महज दिल को बहलावा देने के इरादे से नहीं कह रहे। अपने इस जोश और कॉन्फिडेंस के पीछे वह दिनभर बाजारों के लगाए गए चक्कर और लोगों से होने वाली मुलाक़ातों का हवाला देते हैं। साथ ही यह भी कहते हैं कि देख लीजिएगा ऐसा ही होगा।
आजम खान मामले में सपा के सहयोग पर मतीन की थ्योरी बिलकुल अलहदा थी। मतीन के मुताबिक, सपा इस इन्तिजार में हैं कि आजम खान अपनी रिहाई के लिए भाजपा का दामन थामें और सपा को उनसे दूर होने का मौका मिले। यहाँ भी मतीन ने पूरे विश्वास के साथ अपना पिछले वक्तव्य दोहराया कि देख लीजिएगा, ऐसा ही होगा।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष हिंदवी के मुताबिक़, जिस समय अकबरनगर के निवासियों को इस सरकार ने बुलडोज करने के बाद उन्हें बरसों पुराने घरों से बेदखल कर दिया और इन्हें बसंतकुंज शिफ्ट किया वहां पर यह लोग भी अपनी टीम के साथ पहुंचे। वह बताते हैं कि इस बदहाली में उन्होंने वहां एक अधेड़ उम्र मुस्लिम महिला को यह कहते सुना- हमें राहुल भैया पर भरोसा है। वह कहते हैं कि यह उम्मीद एक ऐसी महिला का बयान था जिसको कोई स्वार्थ नहीं, वह बेघर हो चुकी थी, उसे एक ऐसे कमरे में डाल दिया गया था जिसके लिए उनसे पांच लाख मांगे जा रहे थे। वह इसे लोगों पर राहुल का बढ़ता हुआ ट्रस्ट बताते हैं। उनके अनुसार, खासकर भारत जोड़ी यात्रा के बाद से राहुल गांधी का लोगों से कनेक्ट बना है। मौजूदा सरकार में जो भी समुदाय सत्ता के निशाने पर रहा है, वह इस समय कांग्रेस से आस जोड़ रहा है। सपा से मोहभंग और कांग्रेस में वापसी के सवाल
उनका कहना है कि ये हकीकत है कि कम्युनिटी का ट्रस्ट हासिल करना इतना आसान नहीं होता है। इसके बावजूद आने वाले समय में न सिर्फ उत्तर प्रदेश में बल्कि देश में मुस्लिम कम्युनिटी एक स्ट्रांग पिलर बनकर वापस कांग्रेस के साथ ऐसे ही खड़ी होगी जैसे वह जवाहर लाल जी और इंदिरा जी के साथ खड़ी थी।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने दोनों ही बातों का खंडन किया। उनका कहना था कि दोनों ही बातें सिरे से गलत हैं, न तो मुस्लमान सपा से किनाराकशी कर रहा है और न ही कांग्रेस की तरफ लौट रहा है। तजीन खान के सपा से नाउम्मीदी पर राजेंद्र चौधरी ने जवाब दिया कि पार्टी बराबर से उनके साथ खड़ी है। उनके अनुसार, ऐसे में तज़ीन खान अगर कुछ सोचती या कहती हैं तो यह उनका व्यक्तिगत नजरिया हो सकता है। आगे उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि इस समय वह एक मुश्किल दौर से गुजर रही हैं मगर उन्हें भी सोचना चाहिए कि सपा सत्ता में नहीं है। राजेंद्र चौधरी ने ताजीन खान की कही बात को दोहराते हुए कहा कि हम भी तो वही बात कह रहे हैं जो तजीन खान का कहना है, कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आए तो आजम खान को इंसाफ दिलाने में कोई दिक्कत ही नहीं होगी।








