सुप्रीम कोर्ट में चौंकाने वाली घटना, सुनवाई के दौरान CJI पर जूता फेंकने की कोशिश, वकील हिरासत में

Lucknow Focus News Desk: देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाली और अभूतपूर्व घटना सामने आई। एक व्यक्ति, जो वकील की वेशभूषा में था, ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर जूता/कागज का रोल उछालने की कोशिश की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस शख्स ने कोर्ट रूम के अंदर नारेबाजी भी की। कोर्ट में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे पकड़ा और कोर्ट रूम से बाहर निकाला, जिसके कारण कुछ देर के लिए कोर्ट की कार्यवाही बाधित रही।
सनातन धर्म से जुड़ा था मामला
अदालत में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पकड़े गए शख्स ने “सनातन धर्म का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे लगाए।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव, एडवोकेट रोहित पांडेय ने बताया कि इस व्यक्ति ने यह प्रयास खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करने वाली याचिका खारिज करने और सुनवाई के दौरान सीजेआई द्वारा की गई कथित टिप्पणियों के आधार पर किया।
कानूनी मामलों से जुड़ी वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जब सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच वकीलों से केस के बारे में सुन रही थी, तभी वह व्यक्ति दौड़ता हुआ आगे आया और पैर से जूता निकालकर हमले की कोशिश करने लगा।
सीजेआई ने शांत रहकर जारी रखी कार्यवाही
इस अप्रत्याशित घटना के बाद भी, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने शांत रहते हुए कहा कि उन्हें इन घटनाओं से फर्क नहीं पड़ता। इसके बाद उन्होंने कार्यवाही जारी रखने की बात कही। बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले में जांच बिठा दी है।
पहले भी, खजुराहो मामले में सीजेआई बीआर गवई के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ था, जिसका संज्ञान लेते हुए सीजेआई ने कहा था कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।
वकीलों के संगठनों ने की कड़ी निंदा
बार काउंसिल और एसोसिएशंस ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव रोहित पांडेय ने घटना को बेहद दुखद बताया और कहा कि अगर यह सच है तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCOARA) ने एकमत से इस कृत्य पर गहरी पीड़ा और असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसा आचरण बार के सदस्य के लिए अनुचित है और यह उस आपसी सम्मान की नींव पर प्रहार करता है जो बेंच और बार के संबंधों को बनाए रखता है। SCOARA ने इसे न्यायालय की अवमानना मानकर स्वतः संज्ञान लेने और उचित कार्यवाही शुरू करने की माँग की है।


