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भारत के बिना अजरबैजान की अर्थव्यवस्था को झटका, कच्चे तेल और पर्यटन पर मंडराया संकट

Lucknow Focus News Desk: भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच तुर्की और अजरबैजान के पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने के बाद भारत में ‘बॉयकॉट तुर्की-अजरबैजान’ का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है। सोशल मीडिया पर चल रही इस मुहिम का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है खासकर अजरबैजान की अर्थव्यवस्था पर। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहता है, तो अजरबैजान के कच्चे तेल और पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है।

कच्चे तेल के लिए भारत अहम ग्राहक

भारत अजरबैजान से कच्चा तेल खरीदने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। अजरबैजान से भारत को होने वाले कुल निर्यात में 98% हिस्सा केवल कच्चे तेल का है। 2023 में भारत ने अजरबैजान से लगभग 1.227 बिलियन डॉलर का तेल आयात किया था। हालांकि 2024 की शुरुआत तक यह आंकड़ा घटकर 733.09 मिलियन डॉलर रह गया, जो संकेत देता है कि व्यापारिक संबंधों में पहले से ही गिरावट आ रही थी।

ट्रैवल और वेडिंग इंडस्ट्री पर सीधा असर

भारतीय पर्यटक अब अजरबैजान की यात्रा रद्द कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में 60% से अधिक बुकिंग कैंसिल हुई हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी भारतीय नागरिकों और व्यापारियों से तुर्की और अजरबैजान की यात्रा से परहेज़ करने की अपील की है। इस बहिष्कार का सीधा असर अजरबैजान के टूरिज्म, वेडिंग प्लानिंग, और मनोरंजन उद्योग पर पड़ रहा है।

भारतीय पर्यटक: अजरबैजान के लिए चौथा सबसे बड़ा बाजार

भारत, अजरबैजान के लिए रूस, तुर्की और ईरान के बाद चौथा सबसे बड़ा पर्यटक स्त्रोत है। 2014 में जहां केवल 4,853 भारतीय पर्यटक अजरबैजान गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या 2.43 लाख के करीब पहुंच चुकी है। अकेले 2023 में ही लगभग 1.17 लाख भारतीय पर्यटक अजरबैजान घूमने गए।

विवाह पर्यटन (डेस्टिनेशन वेडिंग) पर भी खतरा

पिछले कुछ वर्षों में अजरबैजान भारतीय डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए एक उभरता हुआ स्थल बन चुका था। भारत से जाने वाली वेडिंग पार्टियों और आयोजनों ने वहां के होटल उद्योग को बड़ी आमदनी दी थी। लेकिन मौजूदा माहौल में कई शादी आयोजन रद्द हो चुके हैं या दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं।

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