लखनऊ

उर्दू पत्रकारों की जीवनी व कार्यों को सहेजने की जरूरत

उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी में सहाफत पर सेमीनार का दूसरा दिन

लखनऊ फोकस न्यूज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की गोल्डन जुबली समारोह के तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत उर्दू पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने के संदर्भ में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन रविवार को उर्दू पत्रकारिता पर पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए आज के स्वरूप में किये जाने वाले कार्यों पर गहन चर्चा हुई।

इस मौके पर प्रयागराज से आईं प्रो. शबनम हमीद ने कहा कि मैं गंगा जमुनी शहर प्रयागराज से हूँ और मुझे साहित्य तथा पत्रकारिता को समझने और समझाने का सबसे उत्तम उदाहरण संगम ही दिखता है, जहाँ दोनों अलग भी नहीं हैं और एक भी नहीं हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पधारे प्रो. काज़ी जमाल साहब ने कहा कि उर्दू अकादमी ने पत्रकारिता पर इस आयोजन को करके वक़्त की ज़रूरत को पूरा किया है। ये जानने और समझने का वक़्त है कि उर्दू पत्रकारिता ने कैसे मुल्क और अवाम की सेवा की है। उर्दू पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों की जीवनी और उनके कार्यों की प्रतियों को सहेजने की आवश्यकता है। इसके साथ की टेक्नोलॉजी के इस दौर में उर्दू पत्रकारिता को सहज सरल बना कर सभी तक पहुँचाना होगा। इस अवसर पर प्रो. सैयद मोहम्मद हाशिम ने भी अपना वक्तव्य रखा। पहले सत्र की अध्यक्षता प्रो0 शबनम हमीद, प्रो0 मोहम्मद हाशिम और प्रो0 क़ाज़ी जमाल ने की।

दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रो0 नसीम अहमद, प्रो मो0 ख्वाजा इकरामुद्दीन तथा नज़मा रहमानी ने की। इस अवसर पर प्रो0 नसीम अहमद ने कहा कि उ0प्र0 उर्दू अकादमी ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर शानदार आयोजन किया तथा आज की संगोष्ठी से आने वाले नस्लों को मार्गदर्शन मिलेगा। प्रो0 मो0 ख्वाजा इकरामुद्दीन ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां हमारी सांस्कृतिक सरगर्मियां हैं, अकादमी के इस आयोजन से बुनियादी तौर पर हमारी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की कद्रदानी से भविष्य की राहें खोलने की दिशा सकारात्मक कोशिश है। पत्रकारिता के अनुकूल रवैये और रुझानों की दिशा में ले जाने के लिये इस तरह के प्रयास ज़रूरी हैं। इस अवसर पर नज़मा रहमानी ने भी सभा को संबोधित किया।

इनके साथ ही पुणे से आये डा0 अबरार अहमद, शकील हसन शम्सी, हक्कानीउल कासमी, सुहैल अंजुम, डा0 मलिक जावेद अनवर, डा0 अक़ील अहमद, डा0 तारिक मंज़ूर, डा0 अबुल बशर, अब्दुल रहमान फैसल, डा0 अब्दुल समी, प्रो0 शहाब इनायत मलिक, प्रो0 सैयद सिराज अकमली, डा0 हसन ज़िया, मासूम मुरादाबादी, डा0 मामून रशीद ने अपने शोधपत्र भी पढ़े। कार्यक्रम के पहले सत्र का संचालन डा0 मोहम्मद अकमल ने तथा दूसरे सत्र का संचालन डा0 आफताब नज़मी ने किया।

अकादमी चेयरमैन चौधरी कैफ़ुलवरा अंसारी तथा सचिव एस0एम0 आदिल हसन ने सभी का बुके, स्मृति चिन्ह व शाल दे कर का स्वागत किया। इस मौके पर अकादमी के मेंबर डा0 शादाब अहमद, डा0 रिज़वाना, इस्लाम सुल्तानी, हाजी ज़हीर, सलीस बेग, माहे तिलत सिद्दीकी आदि के साथ साथ उर्दू के तमाम चाहने वाले बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 

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