उत्तर प्रदेश

केंद्रीय टीम ने परखी फाइलेरिया अभियान की हकीकत, दिए अहम सुझाव

Lucknow Focus News Desk: दिल्ली से आई तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम ने उत्तर प्रदेश में चल रहे फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की गहनता से समीक्षा की। टीम ने रायबरेली और फतेहपुर में कई जगहों का दौरा किया और अभियान के नतीजों से संतुष्टि जताई, लेकिन साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

रायबरेली और फतेहपुर का दौरा

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडी) की संयुक्त निदेशक डॉ. रिंकू शर्मा के नेतृत्व में आई इस टीम ने रायबरेली के बछरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और उसके आस-पास के गाँवों का दौरा किया। टीम ने यहाँ स्थापित बूथों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की। इसके बाद टीम ने फतेहपुर के बिठौरा ब्लॉक स्थित भसौनी गाँव का भी दौरा किया, जहाँ फाइलेरिया के काफी मरीज हैं।

क्या मिले सुझाव?

केंद्रीय टीम ने पाया कि अभियान का कवरेज 65-70% तक हो गया है, जो एक अच्छी बात है। हालाँकि, अभी भी लगभग 30% लोग, खासकर बुजुर्ग और पुरुष, दवा खाने से इनकार कर रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए टीम ने कुछ अहम सुझाव दिए:

सुपरवाइजरी विजिट बढ़ाएं: अभियान की निगरानी और समीक्षा को और अधिक मजबूत किया जाए।

‘रेफ्यूजल केस’ पर काम करें: जो लोग दवा खाने से मना कर रहे हैं, उन पर रोज काम किया जाए और उन्हें दवा के फायदे समझाए जाएं।

लोगों को जोड़ें: स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वयं सहायता समूहों की मदद से समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जाए।

सकारात्मक नतीजे, फिर भी चुनौतियां बाकी

रायबरेली के मुख्य विकास अधिकारी अर्पित उपाध्याय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि इन सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा। खासकर, दवा खाने से मना करने वालों को समझाने के लिए अन्य विभागों से भी सहयोग लिया जा रहा है।

एम्स रायबरेली के डॉ. भोलानाथ ने बताया कि जागरूकता बढ़ने से कवरेज तो बढ़ा है, लेकिन बचे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए अभी और भी कड़ी मेहनत करनी होगी। भसौनी गाँव में टीम ने कार्यकर्ताओं को और अधिक लगन से काम करने की हिदायत दी।

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