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धराली में कुदरत का कहर: बादल फटा, भूस्खलन से तबाही, आंखों में आंसू लेकर पहुंचे सीएम धामी

उत्तरकाशी के धराली गांव में बादल फटने और भूस्खलन ने मचाई भारी तबाही, राहत-बचाव कार्य में जुटी सेना और प्रशासन की टीमें

Lucknow Focus News Desk: उत्तराखंड के धराली गांव में जो दृश्य सामने आया, वह किसी खौफनाक सपने से कम नहीं था। अचानक पहाड़ों से आई गड़गड़ाहट, फिर आसमान से बरसती आफत और पलक झपकते ही गांव मलबे में तब्दील हो गया। बादल फटने और उसके बाद हुए भूस्खलन ने पूरे इलाके में हाहाकार मचा दिया। कई घर, दुकानें और इमारतें इस कदर जमींदोज हो गईं कि अब वहां सिर्फ टूटी दीवारें, बिखरे सामान और टूटी उम्मीदें बची हैं।

सीएम धामी ने पहुंचकर बांधा ढांढस, बोले- “एक भी व्यक्ति बिना मदद के नहीं छोड़ा जाएगा”

आपदा के अगले ही दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद धराली पहुंचे। मलबे के बीच रोते-बिलखते परिवारों को देखकर उनकी आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने प्रभावित लोगों से मिलकर उनका हाल जाना, दर्द साझा किया और मौके पर चल रहे राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि इस समय सरकार की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। हमने सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, एसडीआरएफ और सभी एजेंसियों को राहत कार्यों में पूरी ताकत से लगाया है। कोई भी पीड़ित मदद से वंचित नहीं रहेगा।

राहत कार्य तेज, लापता लोगों की तलाश जारी

भारतीय सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन कुछ लोग अब भी लापता हैं।

हेलीकॉप्टरों की मदद से गांव में राहत सामग्री, मेडिकल टीम और जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन ने प्रभावितों के लिए अस्थायी शिविरों की व्यवस्था भी की है, जहां उन्हें भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं।

राज्य-केंद्र सरकार कर रही मिलकर काम, फिर से बसाए जाएंगे उजड़े घर

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य सरकार केंद्र से लगातार संपर्क में है और हरसंभव मदद ली जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों का सब कुछ तबाह हो गया है, उन्हें फिर से बसाया जाएगा।

धराली की यह त्रासदी एक बार फिर यह दिखा गई कि पहाड़ों में प्रकृति की मार कितनी घातक हो सकती है। लेकिन साथ ही इसने यह भी साबित किया कि जब सरकार, सेना और आम लोग एकजुट होकर काम करते हैं, तो सबसे बड़ी आपदा को भी हराया जा सकता है।

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