कोलोन कैंसर का टीका तैयार, रूस ने प्रीक्लिनिकल ट्रायल में सफलता का किया दावा

Lucknow Focus News Desk: कोलोन कैंसर के इलाज के लिए विकसित किए गए एक नए टीके ने अपने सभी प्रीक्लिनिकल ट्रायल पूरे कर लिए हैं। रूस की संघीय चिकित्सा और जैविक एजेंसी (FMBA) ने दावा किया है कि यह टीका सुरक्षित और प्रभावी है। यह खबर दुनिया भर के उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर आई है, जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं।
एफएमबीए की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने बताया कि यह शोध कई सालों से चल रहा था, जिसमें पिछले तीन साल अनिवार्य प्रीक्लिनिकल अध्ययनों को समर्पित थे। mRNA तकनीक पर आधारित यह ‘एटोमिक्स कैंसर वैक्सीन’ अब इस्तेमाल के लिए तैयार है। इसका शुरुआती लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलोन कैंसर) होगा।
जल्द ही क्लिनिकल ट्रायल की उम्मीद
हालांकि, यह टीका अभी प्रीक्लिनिकल चरण में है और क्लिनिकल उपयोग के लिए इसकी मंजूरी अभी बाकी है। स्क्वोर्त्सोवा के अनुसार, क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज़ रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिए गए हैं।
माना जा रहा है कि इसका व्यावसायिक उत्पादन 2025 से 2026 तक शुरू हो सकता है। ‘द फार्मा लेटर’ के अनुसार, प्रति खुराक की लागत लगभग 300,000 रूबल (लगभग $3,300) होगी, जिसे सरकार वहन करेगी।
60 से 80 प्रतिशत तक प्रभावी
रूसी समाचार एजेंसी TASS ने बताया कि इस टीके का ट्रायल अलग-अलग मरीजों पर किया गया है और इसके परिणाम काफी सकारात्मक रहे हैं। जिन मरीजों पर इसका परीक्षण हुआ, उनमें ट्यूमर के बढ़ने की गति धीमी हो गई। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह टीका कैंसर को रोकने में 60 से 80 प्रतिशत तक सफल रहा है।
कोलोन कैंसर बड़ी आंत के निचले हिस्से में होता है और अक्सर शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते। इसके कुछ हल्के लक्षण, जैसे मल त्याग की आदतों में बदलाव, खून आना या पेट में तकलीफ महसूस होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।




