उत्तर प्रदेश

फाइलेरिया के खिलाफ एकजुट हुआ सामुदायिक रेडियो नेटवर्क, 11 जिलों में चलाएगा जागरूकता अभियान

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में चल रहे फाइलेरिया उन्मूलन अभियान (एमडीए) को अब सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का भी साथ मिलने जा रहा है। राज्य के 11 जिलों के रेडियो स्टेशनों ने यह संकल्प लिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को इस बीमारी और इसके बचाव के बारे में जागरूक करेंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग एमडीए कार्यक्रम से जुड़ें और दवा सेवन के लिए आगे आएं।

राज्य फाइलेरिया अधिकारी की मौजूदगी में बुधवार को लखनऊ में आयोजित एक वर्चुअल कार्यशाला में सामुदायिक रेडियो से जुड़े अधिकारी और रेडियो जॉकी इकट्ठा हुए। इस दौरान उन्होंने फाइलेरिया के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और 10 अगस्त से शुरू हो रहे एमडीए अभियान को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग देने का वादा किया।

11 जिलों के 14 रेडियो स्टेशन निभाएंगे अहम भूमिका

इस संकल्प में शामिल जिलों में गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर, गोंडा, बहराइच, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली और सुल्तानपुर शामिल हैं। इन जिलों के 14 सामुदायिक रेडियो स्टेशन अब स्थानीय भाषा और बोली में विश्वसनीय आवाज़ों के माध्यम से फाइलेरिया से जुड़ी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचाएंगे।

कौन हैं ज़द में और क्या है तैयारी?

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने बताया कि वर्ष 2024 में 340 ब्लॉकों में एमडीए अभियान चलाया गया था, लेकिन इस बार वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर 195 ब्लॉकों को लक्षित किया गया है। इन ब्लॉकों की पहचान रात्रिकालीन रक्त परीक्षण के ज़रिए की गई है, जहाँ परीक्षण किए गए 300 लोगों में कम से कम तीन की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई।

इस बार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि दवाओं और सेवाओं की पहुँच उन्हीं क्षेत्रों तक हो जहाँ इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। यह लक्षित रणनीति एमडीए कार्यक्रम की सफलता को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

दवा, सुरक्षा और समाज

कार्यक्रम में उपस्थित रेडियो प्रज्ञा कुशीनगर के आरजे नवनीत ने एक प्रेरक किस्सा साझा करते हुए बताया कि किस तरह एक गाँव में फाइलेरिया पीड़ित व्यक्ति का माला पहनाकर स्वागत किया गया। यह पहल समाज में कलंक की भावना को दूर करने और रोगियों को सम्मान देने की दिशा में एक शानदार उदाहरण बन गई।

डॉ. चौधरी ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली दवाएँ एल्बेंडाज़ोल, डीईसी और आइवरमेक्टिन पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनके दुष्प्रभाव बहुत ही मामूली होते हैं। फिर भी, हर ब्लॉक में दो त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRT) तैनात किए जाएँगे, जो किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे।

“आपकी आवाज़, आपकी ज़िम्मेदारी”

कार्यशाला के समापन पर SMART संस्था की संस्थापक अर्चना कपूर ने सभी सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की सक्रिय भूमिका के लिए आभार जताया और उम्मीद जताई कि उनकी आवाज़ से इस बार का एमडीए अभियान और भी सफल साबित होगा।

 

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