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GST दरें बदलने पर कंपनियों को मिली राहत, अब पुराने पैकेट पर नहीं लगाना होगा नया MRP स्टिकर

Lucknow Focus News Desk: केंद्र सरकार ने उपभोक्ता वस्तुओं पर जीएसटी दरों में बदलाव के बाद कंपनियों को एक बड़ी राहत दी है। अब कंपनियों के लिए 22 सितंबर, 2025 से पहले बने पैकेट वाले उत्पादों पर नया MRP (अधिकतम खुदरा मूल्य) स्टिकर लगाना अनिवार्य नहीं होगा। यह फैसला उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने उद्योग और व्यापार संगठनों की मांग पर लिया है, ताकि कंपनियों को बेवजह की परेशानी न हो।

पुराना नियम और नया नियम

पहले, जब भी जीएसटी दरों में बदलाव होता था, कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक पर नए MRP स्टिकर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। अब सरकार ने इस नियम को बदल दिया है। इसका मतलब है कि अगर कोई प्रोडक्ट 22 सितंबर, 2025 से पहले बना है और वह अभी तक बिका नहीं है, तो उसे पुरानी MRP पर ही बेचा जा सकता है। हालांकि, अगर कोई कंपनी चाहे तो अपनी इच्छा से नया स्टिकर लगा सकती है, लेकिन यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है।

उपभोक्ता के लिए पारदर्शिता जरूरी

मंत्रालय ने यह साफ कर दिया है कि अगर कोई कंपनी पुराने पैकेट पर नया स्टिकर लगाती है, तो उस पर पुराने मूल्य की जानकारी स्पष्ट और पढ़ने लायक होनी चाहिए। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि उपभोक्ता को यह पता चल सके कि पहले कीमत क्या थी और अब क्या है। यह नियम उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाएगा।

विज्ञापन की शर्त भी खत्म

सरकार ने एक और बड़ी शर्त खत्म कर दी है। पहले, जब भी कोई कंपनी अपने उत्पादों की कीमत बदलती थी, तो उसे इसकी जानकारी दो अखबारों में विज्ञापन देकर देनी होती थी। अब यह शर्त हटा दी गई है। इसके बजाय, कंपनियों को सिर्फ थोक और खुदरा विक्रेताओं को नई कीमत की जानकारी देनी होगी। यह जानकारी सरकार के संबंधित विभागों को भी भेजनी होगी।

कंपनियां अब 31 मार्च, 2026 तक या पुराने स्टॉक के खत्म होने तक पुराने पैकेट और रैपर का इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर कीमतें बदली हैं, तो वे स्टिकर, स्टैंप या ऑनलाइन प्रिंटिंग के जरिए नई कीमत बता सकती हैं। इस पहल से न केवल कंपनियों को राहत मिलेगी, बल्कि यह प्रक्रिया को भी आसान बनाएगा।

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