8वां वेतन आयोग लागू न होने पर देशभर के पेंशनर्स और शिक्षकों का हल्ला बोल, लखनऊ समेत यूपी के जिलों में प्रदर्शन

Lucknow Focus News Desk: देशभर में आज लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर्स सड़कों पर उतरे। केंद्र सरकार की नीतियों और वादाखिलाफी के खिलाफ गुस्सा जताते हुए उन्होंने धरना-प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। आंदोलन की अगुवाई अखिल भारतीय स्टेट गवर्नमेंट पेंशनर्स फेडरेशन और उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी व पेंशनर्स एसोसिएशन ने की।
8वें वेतन आयोग की घोषणा के बावजूद अब तक कोई अमल नहीं
सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सबसे बड़ा आक्रोश 8वें वेतन आयोग को लेकर है। जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में इस आयोग की घोषणा की गई थी, लेकिन 6 महीने बाद भी इसका कोई गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। न ही अध्यक्ष या सदस्यों की नियुक्ति हुई और न ही टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय किए गए। इससे लाखों पेंशनर्स के बीच निराशा और असंतोष गहराता जा रहा है।
पेंशन नियमों में बदलाव पर भी गहरा ऐतराज
सीसीएस (पेंशन) रूल्स 2021 में हुए हालिया बदलावों को लेकर भी पेंशनर्स ने नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि इन संशोधनों से अब रिटायरमेंट की तारीख के आधार पर पेंशनर्स के साथ भेदभाव का रास्ता खुल गया है, जो अनुचित और असंवेदनशील है।
लखनऊ में वीएन सिंह प्रतिमा स्थल पर हुआ प्रदर्शन
राजधानी लखनऊ में हजारों कर्मचारी और शिक्षक वीएन सिंह प्रतिमा स्थल पर दोपहर 3 बजे जुटे। सभी ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए सरकार को चेताया कि अगर जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष अमरनाथ यादव और महामंत्री ओ.पी. त्रिपाठी ने कहा, “सरकार अगर वेतन आयोग को लागू करने में टालमटोल करती रही तो यह कर्मचारी वर्ग के साथ सरासर अन्याय होगा।”
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा और माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी ने भी जनसभा को संबोधित किया और सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए।
11000 प्राथमिक स्कूलों की बंदी पर भी रोष
धरने में मौजूद शिक्षक नेताओं ने यूपी सरकार द्वारा 11,000 प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के फैसले की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला गरीब बच्चों की शिक्षा पर सीधा हमला है और इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी भी संकट में आ जाएगी।
पुरानी पेंशन योजना और कोरोना काल के बकाए डीए पर भी उठी आवाज
अखिल भारतीय कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष कमलेश मिश्रा ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली, कोरोना काल के 18 महीनों का डीए बकाया, और 15 साल की पेंशन कटौती की अवधि को घटाकर 10 साल करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि “सरकार सिर्फ चुनावों के वक्त वादे करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं करती।”
कई संगठनों ने दिया समर्थन
धरने में उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ, लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन, शिक्षक संगठनों और अन्य सेवा संघों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। लखनऊ जनपद के अध्यक्ष अंगद सिंह, सचिव आर.सी. उपाध्याय, श्याम सिंह राठौर, एस.के. अवस्थी समेत तमाम पदाधिकारियों ने भी धरने को संबोधित किया।




