डिजिटल क्रिएटर सुभाश्री साहू बनेंगी ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ अभियान के लिए ‘यूथ एम्बेसडर’

Lucknow Focus News Desk: उभरती हुई जेन-जी (Gen Z) इन्फ्लुएंसर और व्लॉगर शुभश्री साहू ने “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” अभियान में यूथ एम्बेसडर के रूप में अपनी सेवाएं देने की औपचारिक घोषणा की है। अपने प्रशंसकों के बीच “डिजिटल ड्रीमवीवर” और “वाइब आर्किटेक्ट” के रूप में मशहूर साहू अब अपनी डिजिटल पहुंच को सामाजिक सुधार की दिशा में मोड़ना चाहती हैं। उनका मुख्य लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों—No Poverty (SDG-1) और Zero Hunger (SDG-2) को प्राप्त करना है।
अपनी जेन-जी फैनबेस को प्रेरित करने के लिए, साहू ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा ‘सिटीजन फॉर भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ (Citizens for Begging-Free India) के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा है। उनका लक्ष्य एक ऐसे समतावादी समाज के लिए अभियान चलाना है जहां किसी भी नागरिक को बुनियादी जरूरतों के लिए भीख न मांगनी पड़े।
नीति और सामाजिक सुरक्षा का समर्थन
साहू ने भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों के सामाजिक संरक्षण के लिए NHRC के हालिया दिशानिर्देशों को “क्रांतिकारी” बताया है और भारत सरकार की SMILE (सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज) योजना को एक ऐतिहासिक पहल करार दिया है। इस नेक कार्य के लिए वालंटियर बनकर, वह सरकारी नीतियों और युवाओं की भागीदारी के बीच की दूरी को घटाना चाहती हैं।
“गरीबी मानवता और सभ्यता पर सबसे बड़ा अभिशाप है जो लोगों को दो वक़्त की रोटी के लिए भीख मांगने पर मजबूर करती है,” शुभश्री साहू ने कहा। “मैं चाहती हूँ कि आने वाली पीढ़ी इन वंचित और बेसहारा साथी नागरिकों की परवाह करे। मैं एक गरीबी मुक्त समाज के प्रति जागरूकता पैदा करने में NHRC, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और ‘सिटीजन फॉर भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ की मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ।”
वायरल पहुंच को सामाजिक प्रभाव में बदलना
अभी छात्रा होने के बावजूद, साहू की डिजिटल लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है:
- इंस्टाग्राम: 8.57 लाख फॉलोअर्स (@subhaslyf)
- यूट्यूब: 1.2 लाख सब्सक्राइबर्स (@subhaback)
- इंगेजमेंट: मात्र दो वर्षों में 1 करोड़ से अधिक व्यूज
हालाँकि उनकी प्रसिद्धि सहज रूप से शुरू हुई थी, लेकिन अब साहू अपने प्लेटफॉर्म को एक विशेष उद्देश्य देना चाहती हैं। ‘कॉज़ एम्बेसडर’ के रूप में काम करके, वह प्रियंका चोपड़ा जोनास (यूनिसेफ गुडविल एम्बेसडर), दीया मिर्जा (यूएन गुडविल एम्बेसडर), और प्राजक्ता कोली जैसे दिग्गजों के नक्शेकदम पर चलने का लक्ष्य रखती हैं, जिन्होंने मनोरंजन की दुनिया से ऊपर उठकर वास्तविक दुनिया की समस्याओं को सुलझाने में योगदान दिए है।
जेन-जी के लिए आह्वान
साहू की यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि “मुखर और सामाजिक रूप से सक्रिय” जेन-जी पीढ़ी राष्ट्र निर्माण की चाबी है। उनका यह कदम उनके फॉलोअर्स के लिए एक आह्वान है कि वे केवल डिजिटल सामग्री देखने तक सीमित न रहें, बल्कि हाशिए पर पड़े समुदायों के पुनर्वास और सम्मान की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें।
पहल के बारे में
“भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” अभियान, ‘सिटीजन फॉर भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ (CBFI) द्वारा चलाया जा रहा है। यह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशानिर्देशों और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के ‘SMILE-Beggary’ प्रोजेक्ट के अनुरूप काम करता है। इसका उद्देश्य भिक्षावृत्ति को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, बाल भिक्षुओं की शिक्षा, पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और स्थायी आजीविका के माध्यम से भिक्षावृत्ति के विकल्प प्रदान करना है। जर्मनी में रहने वाले भारतीय प्रवासी डॉक्टर डॉ. पार्थ चोपड़ा इसके संयोजक हैं, और चेन्नई स्थित इंजीनियर गायत्रीबाई रविंदर निदेशक हैं। इस आंदोलन में कई अर्थशास्त्री, पूर्व आईएएस अधिकारी, और शीर्ष कॉर्पोरेट प्रबंधक शामिल हैं।




