डीएलएड कोर्स होगा खत्म, फिर कैसे पूरा होगा छात्रों का शिक्षक बनने का सपना? जानिए डायट प्राचार्य ने क्या कहा


Lucknow Focus News Desk: देशभर में शिक्षक बनने का सपना संजोने वाले हजारों छात्रों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत वर्ष 2030 तक डीएलएड कोर्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा, जिसकी जगह अब चार वर्षीय इंटीग्रेटेड शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स लेगा।
नोएडा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य राज सिंह यादव ने विशेष बातचीत में छात्रों की भविष्य की राह, परिषदीय स्कूलों की स्थिति और प्रशिक्षण प्रणाली में बदलावों को लेकर विस्तार से चर्चा की।
डीएलएड खत्म क्यों होगा और क्या होगा विकल्प?
प्राचार्य राज सिंह यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार, डीएलएड या बीटीसी की जगह अब चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स को लागू किया जाएगा। यह कोर्स इंटरमीडिएट के बाद शुरू होगा और इसके पूरा होने पर छात्रों को ग्रेजुएशन और शिक्षक प्रशिक्षण – दोनों की डिग्री प्राप्त होगी।
उन्होंने कहा कि गौतमबुद्धनगर की डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में चयनित किया गया है। यहां सभी विज्ञान विषयों की अत्याधुनिक लैब, डिजिटल लिटरेसी के लिए कंप्यूटर लैब और समृद्ध लाइब्रेरी तैयार की जा रही है।
क्या होगा इस कोर्स का करियर पर असर?
चार वर्षीय कोर्स पूरा करने के बाद छात्र को जो डिग्री मिलेगी, वह बीएड और डीएलएड के समकक्ष मानी जाएगी। इसके आधार पर उन्हें सरकारी और निजी स्कूलों में शिक्षक बनने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों में भी उनके लिए करियर के नए दरवाजे खुलेंगे।
बच्चों की उपस्थिति और नामांकन में गिरावट क्यों?
प्राचार्य यादव ने बताया कि जिले के स्कूलों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों के बच्चे पढ़ते हैं। जब उनके माता-पिता काम के सिलसिले में बाहर जाते हैं, तो बच्चों की उपस्थिति प्रभावित होती है। ऐसे में शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मोबाइल फोन या ऑनलाइन माध्यमों से अभिभावकों के संपर्क में रहें।
उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए शनिवार को खेलकूद और मनोरंजन गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, ताकि बच्चे स्कूल आने को लेकर उत्साहित रहें।
डिजिटल डायट से क्या मिला फायदा?
राज सिंह यादव ने बताया कि 2023 में डायट का डिजिटलीकरण हो गया था, जिससे छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल लिटरेसी का बड़ा लाभ मिला। अधिकतर शिक्षक एआई और तकनीकी कौशल में प्रशिक्षित किए गए हैं, जो अब बच्चों को भी डिजिटल दुनिया के लिए तैयार कर रहे हैं।
आरटीई सीटें खाली क्यों रह जाती हैं?
आरटीई के तहत हर साल 70% से अधिक सीटें खाली रह जाती हैं। इसका मुख्य कारण निजी स्कूलों द्वारा नियमों का गलत इस्तेमाल और अभिभावकों को गुमराह करना है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो आरटीई चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलवाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
शिक्षक प्रशिक्षण में बदलाव क्यों?
अब शिक्षकों को सालभर की बजाय सिर्फ पांच दिन का केंद्रित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में सुरक्षा, जीवन कौशल, डिजिटल लिटरेसी और एआई जैसे विषय शामिल हैं। इसका उद्देश्य है कि शिक्षक बार-बार स्कूल से बाहर न जाएं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
डीएलएड कोर्स के समाप्त होने से छात्रों में असमंजस की स्थिति जरूर बनी है, लेकिन नई शिक्षा नीति के अंतर्गत आने वाला चार वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स न सिर्फ अधिक व्यापक और व्यावसायिक होगा, बल्कि यह शिक्षक बनने के इच्छुक छात्रों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करेगा। डिजिटलीकरण, खेल और प्रशिक्षण के माध्यम से परिषदीय स्कूलों को भी नए सिरे से तैयार किया जा रहा है ताकि शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।




