क्या दांतों की कैविटी खुद से ठीक हो जाती है? जानिए इसकी सच्चाई

Lucknow Focus News Desk: दांतों की कैविटी किसी भी उम्र में हो सकती है, हालांकि यह समस्या बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है। बच्चे मीठा ज्यादा खाते हैं और ब्रश करने से कतराते हैं, जिसके कारण दांतों में छोटे-छोटे गड्ढे यानी कैविटी बनने लगते हैं। कई लोग मान लेते हैं कि जैसे-जैसे दांत मजबूत होंगे, कैविटी खुद ही खत्म हो जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि एक बार दांत सड़ना शुरू हो जाए तो यह प्रक्रिया बिना इलाज के खुद नहीं रुकती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।
कैविटी कैसे बनती है?
दांतों पर जमा होने वाला प्लाक (एक चिपचिपा परत) कैविटी का कारण बनता है। मीठा और चिपचिपा खाना खाने से दांतों पर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। अगर इन्हें साफ न किया जाए तो ये शुगर को एसिड में बदलते हैं। यही एसिड धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी परत इनेमल को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। शुरुआत में हल्का असर होता है, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह कैविटी का रूप ले लेता है।
कब सतर्क हों?
दांत में गड्ढा नजर आए।
मीठा, ठंडा या गरम खाने पर दर्द या सेंसिटिविटी महसूस हो।
दांत में लगातार दर्द बना रहे।
खाना फंसने लगे या मुंह से बदबू आने लगे।
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि संक्रमण दांत की नस तक पहुंच जाए तो रूट कैनाल या दांत निकालने तक की नौबत आ सकती है।
कैविटी का इलाज
शुरुआती स्टेज में खानपान और डेंटल हाइजीन सुधारकर कैविटी को रोका जा सकता है।
कैल्शियम और फ्लोराइड जैसे मिनरल्स दांतों की सतह को फिर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं।
डेंटिस्ट कैविटी को साफ करके उसमें फिलिंग करते हैं ताकि सड़न आगे न बढ़े।
गहरी कैविटी की स्थिति में रूट कैनाल ट्रीटमेंट या दांत निकालने की जरूरत पड़ सकती है।
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
दिन में दो बार ब्रश करें।
मीठा और चिपचिपा खाना कम खाएं।
फ्लोराइड टूथपेस्ट या माउथवॉश का इस्तेमाल करें।
हर 6 महीने में एक बार डेंटिस्ट से चेकअप जरूर कराएं।




