‘भारतीय वॉश कला चेतना के अमर शिल्पी’: प्रो. सुखवीर सिंघल की 19वीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि

Lucknow Focus News Desk: भारतीय चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा दिलाने वाले वॉश कला के अमर शिल्पी, स्वर्गीय प्रो. सुखवीर सिंघल की 19वीं पुण्यतिथि शनिवार, 29 नवंबर 2025 को उनके कैसरबाग स्थित कला संग्रहालय में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने उनकी कलायात्रा, बहुआयामी व्यक्तित्व और भारतीय कला विरासत में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण किया।

कला यात्रा पर लघु फिल्म का प्रदर्शन
संग्रहालय में संरक्षित लगभग सौ वर्ष पुरानी सिंघलजी की कलाधरोहर आज भी भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सौंदर्यबोध को उसी गहराई से व्यक्त करती है, जो उनकी कला की पहचान थी।
लघु फिल्म: इस अवसर पर उनके जीवन, दर्शन और कलाकृतियों पर आधारित लघु फिल्म ‘The Dusk of Romance’ का प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने अत्यंत भावुक होकर देखा।
कलाकृतियों का प्रदर्शन: फिल्म के बाद उनकी प्रसिद्ध वॉश पेंटिंग्स, रेशमी चित्र, लैकसिट पेंटिंग्स, जलरंग, लकड़ी, कपड़ा, चमड़ा और मूर्तिशिल्प जैसे विविध माध्यमों में किए गए प्रयोगों का अवलोकन कराया गया, जो उनके बहुआयामी और प्रयोगवादी व्यक्तित्व का प्रमाण हैं।

कलाविदों ने किया स्मरण
वरिष्ठ कलाकारों और विद्वानों ने प्रो. सिंघल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके महान योगदान को रेखांकित किया।
जय कृष्ण अग्रवाल (वरिष्ठ कलाकार) ने सिंघल जी को अत्यंत अनुशासित और प्रयोगवादी कलाकार बताया, जिन्होंने कला के लिए कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने दुःख व्यक्त किया कि उनके कद के हिसाब से उनके ऊपर पर्याप्त कार्य नहीं किया गया।
डॉ. अवधेश मिश्रा (कला दीर्घा संपादक) ने सिंघल जी को ‘कला ऋषि’ की उपाधि दी और कहा कि लखनऊ कला और वॉश कला की बात सिंघल जी के बिना अधूरी है। उनके चित्रों में मानव आकृतियों के भाव अद्भुत और भावपूर्ण हैं, जो धार्मिक प्रसंगों और गांधी दर्शन को भी चित्रित करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रो. सिंघल भारतीय चित्रकला पद्धति को जीवित रखने और समृद्ध बनाने वाले कलाकार थे। उनके जलरंगों के दृश्य चित्रण आज भी ताज़े लगते हैं और उनकी वॉश पेंटिंग में ढेर सारे मानव आकृतियों का चित्रण देखने को मिलता है।

देशभक्त और कला के पुरोधा
मुज़फ्फरनगर में 14 जुलाई 1914 को जन्मे प्रो. सिंघल कला के प्रति गहरा अनुराग रखते थे और एक सच्चे देशभक्त के रूप में असहयोग आंदोलन में सक्रिय रहे थे।
उन्होंने लखनऊ के Government School of Art and Crafts से शिक्षा प्राप्त की और 1938 में प्रयागराज में ‘कला भारती’ संस्थान की स्थापना की, जहां इंदिरा गांधी और विश्वनाथ प्रताप सिंह जैसे प्रतिष्ठित विद्यार्थी भी उनसे जुड़े। उन्होंने अवनिंद्रनाथ टैगोर और ए.के. हालदर के मार्गदर्शन में भारतीय रस सिद्धांत पर आधारित वॉश पेंटिंग शैली को विकसित किया, जिसने उनके कार्यों को कालजयी पहचान दिलाई।
उनकी कृति ‘Thou Art Dust, to Dust Returnest’ को ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा रॉयल कलेक्शन में शामिल किया गया था। उन्होंने ‘Evolution of Art and Artist’ नामक तीन-खंडीय ग्रंथ पर 12 वर्षों तक शोध किया, जिसका प्रथम खंड 2025 में लोकार्पित हुआ। उनकी पुस्तक ‘भारतीय चित्रकला पद्धति’ कला दर्शन का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ मानी जाती है।
प्रो. सुखवीर सिंघल का निधन 29 नवंबर 2006 को हुआ था। 2022 में लखनऊ नगर निगम ने कैसरबाग स्थित सड़क को ‘प्रो. सुखवीर सिंघल मार्ग’ नाम दिया था।




