उत्तर प्रदेश

‘हर पंचायत टीबी मुक्त बनेगी’, उत्तर भारत के 7 राज्यों में टीबी उन्मूलन पर उच्च-स्तरीय मंथन

Lucknow Focus News Desk: टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को 2025 तक हासिल करने के लिए जमीन पर रणनीति मजबूत करने हेतु, उत्तर भारत के सात राज्यों/क्षेत्रों के स्वास्थ्य और पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल टीबी डिवीजन, पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

सामुदायिक नेतृत्व और समन्वय पर ज़ोर

अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अमित घोष ने उद्घाटन सत्र में टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामुदायिक नेतृत्व की अनिवार्यता पर जोर दिया। “पंचायत स्तर तक बेहतर समन्वय और सक्रिय सामुदायिक सहभागिता के बिना टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल नहीं हो सकेगा। हमें हर टीबी रोगी की समय पर पहचान और नियमित उपचार सुनिश्चित करना होगा।” उन्होंने उत्तर प्रदेश में टीबी परीक्षण और टीबी-रोकथाम (TB Preventive Treatment) गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।

मुख्य रणनीतिक कदम और नवाचार

कार्यशाला में सेंट्रल टीबी डिवीजन की उपमहानिदेशक डॉ. उर्वशी बी. सिंह ने टीबी उन्मूलन के लिए कई रणनीतिक नवाचारों पर प्रकाश डाला।

टीबी के लक्षणों की पहचान को 4 से बढ़ाकर 10 लक्षण तक करना।

टीबी खोजी अभियान में हाई रिस्क ग्रुप (उच्च जोखिम समूहों) के लिए विशेष योजनाएं चलाना।

मल्टी-ड्रग-रेज़िस्टेंट (MDR) टीबी में BPaLM दवा पद्धति के उत्कृष्ट परिणामों को प्रोत्साहित करना।

पंचायतों की भूमिका: सफलता की कुंजी

सेंट्रल टीबी डिवीजन के संयुक्त आयुक्त डॉ. संजय मट्टू ने सामुदायिक सहभागिता व अंतर-विभागीय समन्वय को कार्यक्रम की सफलता की कुंजी बताया।

पंचायती राज मंत्रालय के निदेशक विजय कुमार ने ग्राम पंचायतों को टीबी उन्मूलन का जमीनी नेतृत्व बताते हुए कहा कि पंचायतें सक्रिय केस खोज, उपचार अनुकरण, समुदाय-आधारित निगरानी और जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू कर रही हैं।

तकनीकी सत्रों में ग्राम प्रधानों ने साझा किया कि वे लक्षणों की जानकारी देने, परीक्षण के लिए प्रेरित करने, ANM व ASHA के साथ दवा वितरण और पोषण सहायता सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

शामिल राज्य/क्षेत्र

कार्यशाला में हिस्सा लेने वाले राज्यों और क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड शामिल थे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय टास्क फ़ोर्स के अध्यक्ष डॉ. अशोक भारद्वाज, उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डब्ल्यूएचओ, आईहैट, केएचपीटी, डब्लूएचपी, सीफार, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज़ सहित अन्य सहयोगी संस्थाओं के सदस्य भी उपस्थित रहे।

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