फिजी सम्मेलन से लौटे साहित्यकारों का अभिनंदन


लखनऊ फोकस ब्यूरो
लखनऊ। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अवध प्रान्त द्वारा लखनऊ के श्री बप्पा वोकेशनल महाविद्यालय के सभागार में नियमित कार्यक्रमों की श्रृंखला में एक विशिष्ट कार्यक्रम का आयोजन 7 अप्रैल 2023 को किया गया। यह विशिष्ट अवसर था, बारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन में लखनऊ के प्रतिभागीगण प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित, प्रोफेसर पवन अग्रवाल लखनऊ विश्वविद्यालय, प्रोफेसर सूर्यकांत के जी एम यू, तथा डॉ पवनपुत्र बादल, प्रबंधक राष्ट्रधर्म एवं राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अभिनन्दन का।
इसी कार्यक्रम में एक हेतु और था, प्रोफेसर पवन अग्रवाल के भारतीय हिंदी परिषद, प्रयागराज का सभापति तथा परिषद के प्रांतीय सह-महामंत्री डॉ बलजीत श्रीवास्तव, सहायक आचार्य, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के भारतीय हिंदी परिषद में प्रचार मंत्री निर्वाचित होने का। इस वृहद आयोजन में एक संगोष्ठी भी आयोजित की गई जिसमें प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित ने साहित्य का प्रदेय, प्रोफेसर पवन अग्रवाल ने तुलसी साहित्य में सामाजिक समरसता, प्रोफेसर सूर्यकांत ने चिकित्सा के क्षेत्र में हिंदी एवं डॉ पवनपुत्र बादल ने फिजी के संस्मरण विषय पर अपने विद्वतापूर्ण, शोध पूर्ण तथा सुग्राह्य, रोचक शैली में अपने विचार व्यक्त किये। जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुशील चंद्र त्रिवेदी ने की एवं प्रान्त अध्यक्ष श्री विजय त्रिपाठी मंच पर उपस्थित रहे। सरस्वती वंदना प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष कुमार तरल, विषय प्रवर्तन प्रान्त अध्यक्ष विजय त्रिपाठी ,धन्यवाद प्रान्त महामंत्री द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, अतिथियों का स्वागत प्रचार मंत्री सर्वेश पाण्डेय, परिषद गीत लखनऊ महानगर अध्यक्ष निर्भय नारायण गुप्ता, वन्देमातरम प्रान्त मंत्री डॉ रीता तिवारी एवं संचालन कार्यक्रम संयोजक सह- महामंत्री अवध प्रान्त डॉ बलजीत श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। अतिथियों के स्वागत के उपरांत प्रान्त अध्यक्ष विजय त्रिपाठी संगोष्ठी में आए वक्ताओं का संक्षिप्त परिचय दिया और संगोष्ठी के विषय का विवरण दिया ।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित जी ने
‘साहित्य का प्रदेय’ विषय पर व्याख्यान’ देते हुए बताया हैं कि साहित्य के प्रकाशित न होने का समस्या का चित्रण यथार्थ तरीके से नही हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि साहित्य इसमें तीन भूमिकाएं निभाता है. ज्ञान,मनोरंजन तथा साहित्य मनुष्य बनाता है। उन्होंने काव्य के 6 उद्देश्यों का वर्णन – यश, अर्थ, लोक, व्यवहार का ज्ञान अमंगल का नाश, पत्नी के समान उपदेश, तत्काल परिणिति आदि .साहित्य डूबते हुए समाज को बचाता है। आगे अपने वक्तव्य में बताया कि अगर रामचरितमानस न लिखा गया होता तो शायद सामूहिक धर्मान्तरण करा दिया होता। मानव जाति दिनो-दिन संवेदना शून्य होती जा रही है। साहित्य की विद्रूपता, अश्लीलता को रोकने के विषय में भी चर्चा किए। । साहित्य समीक्षा, साहित्य के शोध, प्रकाशन, संगोष्ठी नुक्कड़ नाटकों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
विशिष्ट वक्ता प्रो० पवन अग्रवाल
‘तुलसी साहित्य में सामाजिक समरसता’ विषय पर व्याख्यान धर्म समरसता, और राजनीति में वैमनस्य तुलसी के समय व्याप्त था तुलसी के यहां राजतंत्र मे रहते हुए लोकतंत्र की स्थापना है / स्त्री पुरुष तथा सवर्ण और दलित में वैमनस्य का वर्णन तुलसी मूक विद्रोही कवि है। तुलसी ने नारी को स्वच्छन्दता प्रदान की थी। नर नारी दो के युगल रूप का वर्णनकर समरसता दिखाई है। का दायित्व है कि पत्नी व्रत का पालन करे। ढोल गँवार शुद्र पशु नारी की व्याख्या को बहुत ही तार्किक आधार पर दिए।
विशिष्ट वक्ता प्रो.सूर्यकान्त KGMU
‘चिकित्सा क्षेत्र में हिंदी’ विषय पर का व्याख्यान’ दिया उन्होंने बताया कि पुरानी चिकित्सा पद्धति बहुत विकसित थी। प्राथमिक शिक्षा आज भी 80% हिन्दी में हुई है। चिकित्सा में आपको हिन्दी भाषा में शोध करने से रोका गया। 14 अगस्त 1991 विधान सभा में प्रस्ताव पास हुआ आपको हिंदी मे शोध करने का आपको हिंदी में एम.डी. उपाधि में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ हिन्दी की शक्ति को वर्णित किया है।
विशिष्ट वक्ता डॉ. पवनपुत्र बादल, ‘फिजी के संस्मरण’
‘12वां फिजी विश्व हिन्दी सम्मेलन पर वक्तव्य में
फिजी को लोगों ने भारतीय साहित्यकारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। नादी में फिजी के पारम्परिक पस्तुतीकरण पर अपनी बात रखी तथा फिजी को बनाने में भारतीयों का हाथ है। फिजी मे लगभग 40 प्रतिशत हिन्दी भाषी है,
31 देशो से 12वा विश्व हिन्दी सम्मेलन में 1400 लोग आए थे। इससे सम्मलेन सार्थक ढंग से हो गया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद अवध प्रान्त ने बारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन फ़िजी (वर्ष 2023) में भारत
सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिये तथा उनके सृजन में रचनात्मक अभिव्यक्ति से भारतीय संस्कृति, हिन्दी भाषा एवं साहित्य को गौरवान्वित करने के लिये प्रो० सूर्यप्रसाद दीक्षित, डा. पवनपुत्र बादल, प्रो सूर्यकांत को “परिषद गौरव सम्मान” से सम्मानित किया। अखिल भारतीय परिषद, अवध प्रान्त ने बारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन में भारत सरकार के प्रतिनिधि मंडल में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करने एवं भारतीय हिंदी परिषद के नवनिर्वाचित सभापति प्रोफेसर पवन अग्रवाल को “परिषद गौरव सम्मान” से सम्मानित किया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद,अवध प्रान्त ने भारतीय हिन्दी परिषद के नवनिर्वाचित प्रचार मंत्री डा० बलजीत कुमार श्रीवास्तव को भी “परिषद गौरव सम्मान” से सम्मानित किया।
समारोह में अविनाश मिश्र प्रदेश मीडिया प्रमुख, रूपम तिवारी, प्रान्तीय उपाध्यक्ष, सुशील वर्मा प्रांतीय मंत्री, डॉ सुनील शुक्ला, कोषाध्यक्ष अवध प्रान्त, डॉ नीतू शर्मा, अध्यक्ष लखनऊ दक्षिण, मनमोहन बरकोटी अध्यक्ष लखनऊ मध्य, ममता पंकज, महामंत्री लखनऊ महानगर, राजीव वत्सल, डॉ सुरेश पति त्रिपाठी, दिनेश चंद्र अवस्थी, शरद शुक्ल नॉर्वे,डॉ प्रणव मिश्र, डॉ विकास चौरसिया ,उमाशंकर शुक्ल अध्यक्ष गोण्डा जनपद, शिवकांत मिश्र,पूर्व अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग धनन्जय गुप्ता आदि साहित्यकार,शिक्षक, शोधार्थी मौजूद रहे।




