गौरजीत : खुश्बू और स्वाद में लाजवाब, चूसकर खाने वाली आम की सबसे अच्छी प्रजाति का जीआई से बढ़ेगा गौरव

गोरखपुर और बस्ती मंडल सहित सूबे के पूर्वी बेल्ट के लिए गौरजीत ही है आम का राजा
लखनऊ। योगी सरकार ने जिन 15 कृषि उत्पादों के जीआई टैगिंग के लिए आवेदन किया है उसमें गौरजीत भी है। गोरखपुर और बस्ती मंडल सहित पूर्वी बेल्ट के लिए आम का राजा गौरजीत ही है। इसका स्वाद, रंग और खूशबू लोगों का दिल जीत लेता है। आम के सीजन में पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती और संतकबीरनगर जिलों में गौरजीत का बेसब्री से इंतजार रहता है। मलिहाबाद के दशहरी, पश्चिम उत्तर प्रदेश के चौसा, वाराणसी के लंगड़ा और मुंबई के अलफांसो की ही तरह से गोरखपुर और बस्ती मंडल में गौरजीत भी प्रसिद्ध है।
जून 2016 में प्रदेश स्तरीय आम महोत्सव में मिला प्रथम पुरस्कार
गौरजीत के बागान करीब 6000 हेक्टेयर में गोरखपुर-बस्ती मंडल के अलावा बिहार के कुछ जिलों में भी हैं। बिहार में गौरजीत को जर्दालु और मिठुआ नाम से भी जाना जाता है। लोहिया पार्क में जून 2016 में आयोजित प्रदेश स्तरीय आम महोत्सव में इसे प्रथम पुरस्कार मिला था। योगी सरकार इजरायल की मदद से गौरजीत को लोकप्रिय बनाना चाहती है। अर्ली प्रजाति होने के नाते इसका भाव भी अच्छा मिलता है। गौरजीत की आवक जून के दूसरे हफ्ते में शुरू हो जाती है और जब तक डाल की दशहरी आती है तब तक यह खत्म हो जाता है। गौरजीत के तेजी से पकने के कारण इसके भंडारण की उचित व्यवस्था होनी बहुत ही जरूरी है। चूकि गोरखपुर पहले ही देश के प्रमुख महानगरों से हवाई और रेल सेवा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके निर्यात की संभवनाएं भी बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही इसे जीआई मिलने से पूर्वांचल के दर्जनों जिलों के लाखों किसानो को काफी लाभ होगा।
गौरजीत चूस कर खाने वाली आम की सबसे अच्छी प्रजाति
गौरजीत चूस कर खाने वाली आम की सबसे अच्छी प्रजाति है। खुश्बू और स्वाद में गौरजीत का कोई जवाब नहीं है। यह मई के लास्ट या जून के पहले हफ्ते में यह बाजार में आ जाती है। 90 फीसद खपत पूर्वांचल में ही हो जाती है। पिछले सीजन में फुटकर में प्रति कीलोग्राम बेहतर गुणवत्ता वाले गौरजीत के भाव 200 रुपये थे। यह अमूमन यह डाल पर ही पकता है और पत्तियों के साथ बिकता है। मंडी में यह कम ही आता है, क्योंकि इसका सौदा पेड़ में बौर आने के साथ ही हो जाता है।
जीआई टैंगिंग से निर्यात की संभावनाएं बढ़ जाएंगी
योगी सरकार ने गौरजीत समेत 15 उत्पादों के जीआई टैंगिंग के लिए आवेदन किया है। उनमें बनारस का लंगड़ा आम, पान पत्ता, बुंदेलखंड का कठिया गेहूं, प्रतापगढ़ के आंवला, बनारस लाल पेड़ा, लाल भरवा मिर्च, पान (पत्ता), तिरंगी बरफी, ठंडई, पश्चिम यूपी का चौसा आम, पूर्वांचल का आदम चीनी चावल, जौनपुर की इमरती, मुजफ्फरनगर का गुड़ और रामनगर का भांटा गोल बैगन। अब वास्तव में इसे जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) मिल जाता है तो देश-दुनिया में इसके निर्यात की संभावनाएं बढ़ जाएंगी जिससे गौरजीत का गौरव और बढ़ जायेगा इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जीआई टैग को एक ट्रेडमार्क के रूप में देखा जाता है। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय आमदनी में बढोत्तरी होती है।
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