किशोरों के पोषण पर हो सरकार की प्राथमिकता, यूनिसेफ-सरकार की पहल

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश सरकार और यूनिसेफ ने मिलकर स्कूली बच्चों और किशोर-किशोरियों में स्वस्थ आहार और जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण पर चर्चा की।

कुपोषण और जंक फूड बड़ी चिंता
महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जोहरी ने कहा कि सरकार बच्चों और महिलाओं के पोषण को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान और आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए दिए जा रहे पोषण से बच्चों की स्कूलों में उपस्थिति और परिवारों के पोषण स्तर में सुधार हुआ है।

उन्होंने जंक फूड की तरफ बच्चों के बढ़ते आकर्षण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ खेलों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वह स्वस्थ आहार के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाए और भ्रामक विज्ञापनों पर ध्यान न दें।
शिक्षा विभाग की महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का सपना तभी पूरा होगा जब बच्चों का पूर्ण विकास हो। इसके लिए उचित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली बहुत जरूरी है।
नीतिगत सुझावों पर हुई चर्चा
स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में जंक फूड स्टॉल पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।
पोषण और भोजन लेबलिंग को लेकर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाए ताकि वे बच्चों को सही जानकारी दे सकें।
पोषण कार्यक्रमों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून से जोड़ा जाए।
बच्चों में मोटापा एक चुनौती
इस कार्यक्रम में यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट ‘चाइल्ड न्यूट्रिशन ग्लोबल रिपोर्ट 2025’ के आंकड़े भी साझा किए गए, जिसमें बताया गया कि दुनिया भर में मोटापे ने पहली बार बच्चों में कम वजन की दर को पीछे छोड़ दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, आज हर 10 में से 1 बच्चा, यानी 18.8 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार हैं। यह समस्या भारत में भी तेजी से बढ़ रही है, जो एक गंभीर चुनौती है।




