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क्या आपने कभी सोचा है, अंतरिक्ष में खाना कैसे खाते हैं? पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने शेयर किया  VIDEO

शुभांशु शुक्ला ने बताया, 'स्पेस में आप पानी खा सकते हैं', 'धीरे करो, वही तेज है' का दिया मंत्र

Lucknow Focus News Desk: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी नहीं होती, ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष यात्री वहां खाते-पीते कैसे होंगे, जब सब कुछ हवा में उड़ता रहता है?

अब इस सवाल का जवाब भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने खुद दिया है। अपने 18 दिन के मिशन के बाद, अमेरिका से भारत लौटे शुभांशु ने एक दिलचस्प वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने दिखाया है कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में खाने-पीने का उनका अनुभव कैसा रहा।

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हवा में तैरता खाना और ‘बुलबुला’ कॉफी

वीडियो में शुभांशु बताते हैं कि अंतरिक्ष की दुनिया एकदम जादुई लगती है। यहाँ हर चीज़ हवा में तैरती है, इसलिए हर सामान को वेलक्रो या टेप से चिपका कर रखना पड़ता है। यह दिखाने के लिए उन्होंने एक चम्मच को हवा में छोड़ा, जो तुरंत उड़ने लगा।

इसके बाद उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में खाना कैसे खाया जाता है। उन्होंने एक कॉफी का पैकेट उठाया और जैसे ही उसे खोला, स्ट्रॉ से कॉफी बाहर आकर एक बुलबुला बन गई। शुभांशु ने इस बुलबुले को खाकर दिखाया और मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, “स्पेस में आप पानी को सच में खा सकते हैं।”

‘धीरे करो, वही तेज है’

शुभांशु ने अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा, “अंतरिक्ष में खाना… मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे फिर से खाना सीखना पड़ेगा।” उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में एक अच्छा मंत्र है, “धीरे करो, वही तेज है” (Slow is Fast)। उन्होंने समझाया कि अगर आप किसी भी काम में जल्दबाज़ी करेंगे तो गड़बड़ी हो सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि खाना पचाने के लिए ग्रेविटी की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि पेरिस्टाल्सिस नामक एक प्रक्रिया इसके लिए ज़िम्मेदार होती है। यह प्रक्रिया मांसपेशियों के सिकुड़ने और फैलने से होती है, जिससे खाना पाचन तंत्र में नीचे चला जाता है। इसका मतलब है कि सिर ऊपर हो या नीचे, ग्रेविटी हो या न हो, आपका शरीर हमेशा खाना पचाता रहेगा।

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