Health Update: मैग्नीशियम और जिंक की कमी से बढ़ सकता है डिप्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर
मांसपेशियों में मरोड़, थकान और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं लक्षण

Lucknow Focus News Desk: शरीर के लिए जरूरी मिनरल्स की कमी कई बीमारियों का कारण बन सकती है। इनमें सबसे अहम हैं मैग्नीशियम और जिंक, जिनकी कमी सीधे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डालती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मैग्नीशियम की कमी (हाइपोमैग्नेसीमिया) से मांसपेशियों में ऐंठन, उच्च रक्तचाप और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शुरुआत में इसके लक्षण पहचानना मुश्किल होता है, लेकिन जब स्तर बहुत कम हो जाता है तो गंभीर दिक्कतें सामने आती हैं। अमेरिका में करीब 2.5% से 15% लोग इसकी कमी से जूझ रहे हैं।
डॉक्टर्स बताते हैं कि मधुमेह, पुराने दस्त, सीलिएक रोग और शराब सेवन करने वालों में मैग्नीशियम की कमी का खतरा अधिक रहता है।
मैग्नीशियम की कमी के मुख्य लक्षण
- मांसपेशियों में मरोड़, ऐंठन और कंपन
- कभी-कभी दौरे पड़ना
- मानसिक सुन्नता, उदासीनता या डिप्रेशन के लक्षण
- अनियमित दिल की धड़कन
जिंक की कमी और मानसिक स्वास्थ्य
जिंक दिमागी कोशिकाओं को सक्रिय रखने और न्यूरोट्रांसमीटर (सेरोटोनिन, डोपामिन) को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से थकान, उदासी और डिप्रेशन बढ़ जाता है। शोध बताते हैं कि बच्चों और महिलाओं में जिंक की कमी ज्यादा पाई जाती है।
जिंक की कमी से “हैप्पी हार्मोन” का स्तर घट जाता है, जिससे मूड बार-बार बिगड़ता है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और डिप्रेशन या एंग्जाइटी की समस्या उभर सकती है।
किन खाद्य पदार्थों से पूरी करें कमी?
- मैग्नीशियम युक्त आहार
- बीज व मेवे: कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, तिल, काजू और बादाम
- साबुत अनाज और दालें
- हरी पत्तेदार सब्जियां और केले
- जिंक युक्त आहार
- दालें और चना, मसूर, मूंग, राजमा, मूंगफली
- साबुत अनाज: ज्वार, बाजरा, गेहूं, ओट्स
- दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली और मांस
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज या अन्य बीमारी है, तो उन्हें आहार के साथ सप्लीमेंट की भी जरूरत पड़ सकती है।




