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Health Update: गर्दन और पीठ का दर्द सिर्फ पॉश्चर की गलती नहीं, ये छिपे कारण भी बनते हैं बड़ी परेशानी

Lucknow Focus News Desk: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में घंटों कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन पर झुके रहना आम बात है। खासकर ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए गर्दन और पीठ का दर्द अब एक रोज़ की समस्या बनती जा रही है। आमतौर पर हम इसे गलत बैठने के तरीके से जोड़ते हैं, लेकिन असल वजह सिर्फ यही नहीं है।

कुछ ऐसे छुपे हुए कारण भी होते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर की बनावट और सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं, और हम उन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

डॉक्टर्स क्या कहते हैं?

सर्वोदय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग के यूनिट वन प्रमुख बताते हैं कि लगातार बना रहने वाला पीठ और गर्दन का दर्द केवल एक असहजता नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर की हड्डियों की स्ट्रक्चर, मांसपेशियों की ताकत और यहां तक कि नींद की गुणवत्ता तक को प्रभावित करता है।

जब रीढ़ की हड्डी में लगातार तनाव बना रहता है, तो धीरे-धीरे शरीर का पोश्चर बिगड़ने लगता है। इसका असर सिर्फ पीठ तक नहीं, बल्कि सिरदर्द, थकान, फोकस करने में दिक्कत और नींद में कमी जैसे लक्षणों में भी नजर आता है।

इन छिपी वजहों को न करें नज़रअंदाज़

  1. पूरा आराम न मिलना

जब मांसपेशियों को ठीक से रिकवरी का मौका नहीं मिलता जैसे अधूरी नींद या लगातार थकावट तो वे कमजोर होने लगती हैं। इससे रीढ़ की हड्डी को सपोर्ट करने की क्षमता घटती है, और गर्दन-पीठ में खिंचाव शुरू हो जाता है।

  1. पोषक तत्वों की कमी

कैल्शियम, विटामिन D और मैग्नीशियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी हड्डियों और मांसपेशियों को सीधे प्रभावित करती है। इससे मांसपेशियों में जकड़न, सूजन और दर्द होने लगता है। लंबे समय तक खराब खानपान इस समस्या को क्रॉनिक दर्द में बदल सकता है।

  1. तनाव भी है बड़ा कारण

मानसिक तनाव न सिर्फ दिमाग पर असर डालता है, बल्कि शरीर में भी तनाव के हार्मोन मांसपेशियों को टाइट और अकड़ा हुआ बना देते हैं। इससे शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी घटती है और दर्द बढ़ने लगता है।

क्या करें इस दर्द से बचने के लिए?

हर 30-40 मिनट में अपना पॉश्चर चेक करें और हल्का मूवमेंट करें।

7-8 घंटे की नींद पूरी करें ताकि मांसपेशियों को रिकवरी का वक्त मिले।

डाइट में कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर चीजें शामिल करें, जैसे दूध, दही, बादाम, और सूरज की रोशनी।

योग, मेडिटेशन या डीप ब्रीदिंग जैसी एक्सरसाइज़ तनाव को कम करने में मदद करेंगी।

ऑफिस या घर में पीठ को सपोर्ट देने वाली अच्छी चेयर और तकिये का इस्तेमाल करें।

जरूरत महसूस हो तो फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह लेने में देर न करें।

ध्यान रखें:

पीठ और गर्दन का दर्द अगर बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो इसे हल्के में न लें। यह संकेत हो सकता है कि शरीर किसी गहरी थकावट या पोषण की कमी से जूझ रहा है। थोड़ा सा ध्यान और सही रूटीन आपकी सेहत को फिर से पटरी पर ला सकता है।

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