यूपी कैबिनेट का ऐतिहासिक निर्णय, पैतृक संपत्ति बंटवारे के बदले नियम, रेंट एग्रीमेंट पर भी मिली बड़ी राहत

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए पैतृक संपत्ति के हस्तांतरण और किराया पंजीकरण (Rent Agreement) से जुड़े नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। कैबिनेट के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पारिवारिक विवादों को खत्म करना और आम जनता के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) को बढ़ावा देना है।
पैतृक संपत्ति बंटवारा: अब सिर्फ ₹10,000 में रजिस्ट्री
पारिवारिक झगड़ों को सुलझाने के लिए सरकार ने स्टांप शुल्क में भारी कटौती की है। अब तीन पीढ़ियों तक के पारंपरिक वंशजों के बीच अचल संपत्ति का बंटवारा बेहद आसान होगा। अब मात्र ₹10,000 में बंटवारे की रजिस्ट्री हो सकेगी। इसमें ₹5,000 स्टांप ड्यूटी और ₹5,000 निबंधन शुल्क (Registration Fee) शामिल है। यह नियम कृषि, आवासीय और वाणिज्यिक सभी प्रकार की पैतृक संपत्तियों पर लागू होगा। यह व्यवस्था उन वंशजों के लिए है जो उत्तराधिकार कानून के तहत अपना हिस्सा प्राप्त करना चाहते हैं।
किराया पंजीकरण (Rent Agreement) में 90% की छूट
मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच कानूनी पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने रेंट एग्रीमेंट की प्रक्रिया को सस्ता कर दिया है:
स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कमी की गई है।
शुल्क कम होने से अब लोग कच्चे समझौतों के बजाय रजिस्टर्ड एग्रीमेंट को प्राथमिकता देंगे, जिससे विवादों में कमी आएगी।
नए नियमों से किराये की अलग-अलग श्रेणियों और अवधि के अनुसार शुल्क अब पहले के मुकाबले काफी कम होगा।
इस फैसले के मुख्य लाभ
तीन पीढ़ियों से चले आ रहे संपत्ति विवाद अब नाममात्र के खर्च पर सुलझ सकेंगे।
रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट होने से किरायेदारों और मालिकों, दोनों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
अचल संपत्ति के लेन-देन और स्वामित्व में स्पष्टता आएगी।




