uncategorized

ट्रंप का ‘ईरान टैरिफ अटैक’: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

Lucknow Focus News Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘टैरिफ नीति’ के तहत एक और बड़ा धमाका किया है। वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फरमान जारी किया है। ईरान में जारी आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच लिए गए इस फैसले का सीधा असर चीन और ब्राजील के साथ-साथ भारत पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

भारत पर दोहरी मार: 75% तक पहुंच सकता है टैरिफ

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप की यह घोषणा भारतीय निर्यातकों के लिए चिंता का विषय है। भारत पहले से ही अमेरिका के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariff) के दायरे में है। यदि यह नया 25% टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ का बोझ 75% तक पहुंच सकता है। यह भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, भारत लंबे समय से ईरान के शीर्ष पांच व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है।

प्रमुख आयात-निर्यात

भारत क्या बेचता है: बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, ताजे फल, दालें और मांस।

भारत क्या खरीदता है: मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन (सड़क निर्माण सामग्री), सेब, एलपीजी (LPG) और बादाम।

वित्त वर्ष 2022-23: दोनों देशों के बीच 2.33 अरब डॉलर का कुल व्यापार हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22% अधिक था। अप्रैल से जुलाई 2023 के बीच कुल व्यापार 660.70 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का पलड़ा भारी (निर्यात $455.64M) रहा है।

क्या होगा असर?

यदि भारत ईरान के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को बरकरार रखता है, तो अमेरिका की ओर से लगने वाला 25% अतिरिक्त टैरिफ भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के मुनाफे को कम कर सकता है। भारत के लिए अब चुनौती यह है कि वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों और ईरान के साथ अपने व्यापारिक हितों के बीच संतुलन कैसे बनाए।

Related Articles

Back to top button