अपनी मेहनत से मैंने अपनी पहचान बनाई : गोल्डन बॉय 786


समर नाथ निगम
लखनऊ।
खोल दे पंख मेरे कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है,
जमीन नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है।
ये पंक्ति सटीक बैठती है, सीतापुर जिले के खैराबाद के रहने वाले जलीस पर। लोग जलीस को गोल्डन बॉय 786 के नाम से जानते हैं। जब भी जलीस गोल्डन ब्वॉय बनकर कहीं जाते हैं, उनके साथ सेल्फी लेने के लिए होड़ -सी लग जाती है। लोग गोल्डन ब्वॉय को देखकर दंग रह जाते हैं क्योंकि ये एक ही पोजीशन पर बिना हिले स्टैचू की तरह तीन-तीन घंटे तक खड़े रहते हैं।

जब हमारे संवाददाता ने जलीस से पूछा कि गोल्डन ब्वॉय बनने का विचार कैसे आया तो जलीस ने बताया कि मैं खैराबाद के एक छोटे से गांव कोड़री का रहने वाला हूं। मेरा बचपन गरीबी में बीता और फिर सोचा कि कुछ ऐसा करें जो किसी ने ना किया हो, तब गोल्डन ब्वॉय बनने का विचार आया।

जलीस बताते हैं कि मैं इसके लिए घंटों खड़े होकर प्रैक्टिस करता था। भावुक होते हुए जलीस ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब मेरे पास रुपये नहीं थे। तब मेरे दोस्त ने मेरी मदद की। फिर उससे अपने लिए ड्रेस खरीदी और फिर गोल्डन बॉय बनकर जगह-जगह खड़ा होकर अपनी कला का प्रदर्शन करता था।

उन्होंने आगे बताया कि शुरुआत में गांव के लोग ताने देते थे पर उन सब को अनसुना करते हुए मैं आगे बढ़ता गया और फिर मैंने गोल्डन बॉय 786 के नाम से यूट्यूब चैनल के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी अपना एकाउंट बनाया। आज हमारे हजारों फॉलोवर्स हैं। खुशी की बात तो यह है कि लोग अब मुझे शादी और पार्टियों में भी बुलाने लगे हैं। जब लोग खास करके बच्चे मेरे साथ सेल्फी लेते हैं तो मुझे बहुत खुशी होती है कि लोग मुझे पहचानने लगे हैं।
आगे क्या करने का इरादा है, यह पूछने पर जलीस कहते हैं-कई चीजें मेरे दिमाग में चल रही हैं, जल्दी ही कुछ नया करूंगा।




