इनकम टैक्स नोटिस को इग्नोर करना महिला को पड़ा भारी, 1.5 करोड़ रुपये की टैक्स लायबिलिटी जुड़ी

Lucknow Focus News Desk: इनकम टैक्स विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस का सही समय पर जवाब न देना एक महिला करदाता के लिए बेहद भारी साबित हुआ। नोटिस को नजरअंदाज करने के कारण विभाग ने असेसमेंट प्रक्रिया में महिला की कुल आय व लेन-देन में करीब 1.55 करोड़ रुपये की अतिरिक्त टैक्स लायबिलिटी (टैक्स जोड़) जोड़ दी। अब यह मामला दिल्ली स्थित इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) पहुंच गया है, जहां ट्रिब्यूनल ने राहत देते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है।
मामले के मुख्य बिंदु और घटनाक्रम
जसबिंदर कौर नाम की महिला करदाता ने 4 जनवरी 2021 को असेसमेंट ईयर 2020-21 के लिए अपना आईटीआर (ITR) दाखिल कर अपनी वार्षिक आय 10.41 लाख रुपये दर्शायी थी।
बाद में आयकर विभाग को जांच के दौरान महिला के बैंक खातों में 80.94 लाख रुपये के नकद जमा/क्रेडिट और 74 लाख रुपये की संपत्ति (प्रॉपर्टी) खरीद की जानकारी मिली। इसमें से केवल 34 लाख रुपये के लोन का स्पष्टीकरण मिला, जबकि शेष राशि और संपत्ति खरीद का कोई संतोषजनक स्रोत नहीं दिया गया।
विभाग और बाद में आयकर आयुक्त (अपील – CIT(A)) द्वारा भेजे गए कई नोटिसों का महिला ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद CIT(A) ने महिला की अपील खारिज कर करीब 1.55 करोड़ रुपये का टैक्स जोड़ बरकरार रखा।
दिल्ली ITAT में महिला के वकील ने दलील दी कि बीमारी के कारण वे पहले कार्यवाही में शामिल नहीं हो सकीं और संपत्ति के लिए होम लोन व रिश्तेदारों से मदद ली गई थी। ITAT ने कहा कि केवल नोटिस का जवाब न मिलने के आधार पर अपील खारिज नहीं की जानी चाहिए थी, बल्कि तथ्यों की जांच आवश्यक थी। ट्रिब्यूनल ने CIT(A) का आदेश रद्द कर मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया।
करदाताओं के लिए सबक
ITAT ने यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने 1.55 करोड़ रुपये के टैक्स जोड़ को गलत नहीं ठहराया है, बल्कि केवल उचित सुनवाई का मौका दिया है। महिला को अब बैंक स्टेटमेंट, लोन और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज पेश करने होंगे। यह मामला सभी करदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि आयकर विभाग के किसी भी नोटिस को नजरअंदाज न करें और समय पर सही दस्तावेजों के साथ जवाब प्रस्तुत करें।




