बाराबंकी में ‘हिंदी पखवाड़ा’: साहित्यकारों ने हिंदी के गौरव पर दिया जोर

Lucknow Focus News Desk: साहित्य साधना संस्थान बाराबंकी द्वारा विकास भवन परिसर में ‘हिंदी पखवाड़ा समारोह’ का आयोजन किया गया। ओज कवि शिवकुमार व्यास की अध्यक्षता में और व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ के संचालन में यह कार्यक्रम धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान साहित्यकारों और कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व और गौरव पर अपने विचार और रचनाएं प्रस्तुत कीं।
हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मांग
कार्यक्रम की शुरुआत युवा गीतकार साहब नारायण शर्मा की वाणी वंदना से हुई। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनय कुमार दास ने कहा कि हिंदी पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन है जो हिंदी को राजभाषा के रूप में सम्मान देता है। वहीं, समाजसेवी और पत्रकार रत्नेश कुमार ने हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने पर जोर दिया।
संचालन कर रहे अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ ने अपनी पंक्तियों से हिंदी का सम्मान किया:
“कह लल्लू कविराय यही भारत की बिंदी। हर भाषा की मातु मेरी भाषा यह हिन्दी।”
इस मौके पर कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं
गीतकार साहब नारायण शर्मा ने गीत और मुक्तक सुनाए।
ओज कवि डॉ. ओपी वर्मा ‘ओम’ ने अपनी ओजस्वी वाणी में ‘प्रेम रस’ की बात की।
हास्य कवि प्रदीप महाजन ने हिंदी के प्रचार-प्रसार पर छंद और मुक्तक सुनाए।
ओज कवि दीपक दिवाकर ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला।
हास्य व्यंग्य के रचनाकार जितेंद्र श्रीवास्तव ‘जीतू’, गुलजार बानो और लता श्रीवास्तव ने भी अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।
समारोह में रामधारी सिंह दिनकर की जयंती भी मनाई गई। दीपक दिवाकर ने दिनकर की मशहूर कविता ‘कलम आज उनकी जय बोल’ का पाठ कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अध्यक्षीय उद्बोधन में शिवकुमार व्यास ने कहा कि हिंदी हमारे जनमानस की भाषा है और यह देव भाषा की बेटी है। इस कार्यक्रम में सियाराम रावत, मुस्तफा खान, आलोक वर्मा समेत कई साहित्यकार और श्रोता मौजूद थे।
समारोह के दौरान ओज कवि दीपक दिवाकर का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया गया। सभी साहित्यकारों और श्रोताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।




