उत्तर प्रदेश

बाराबंकी में अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य तिलक को काव्यांजलि, कवियों की देशभक्ति से गूंजा सुरजा सदन

Lucknow Focus News Desk: आजादी के महानायकों अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती के मौके पर बाराबंकी जिले के शांतिपुरम स्थित सुरजा सदन में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्तर के ओज कवि डॉ. ओ. पी. वर्मा ‘ओम’ ने की, जबकि संचालन की बागडोर व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ के हाथों में रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ युवा गीतकार साहब नारायण शर्मा की भावपूर्ण वाणी वंदना से हुआ, जिसने माहौल को देशभक्ति की भावना से भर दिया।

कवियों की कलम से निकले वीरों के लिए श्रद्धा सुमन

पत्रकार और समाजसेवी रत्नेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि शहीदों की सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हम समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद के लिए तैयार रहें। उन्होंने अपनी काव्य प्रस्तुति में कहा:

“सुनहरे ख्वाब जो औरों के लिए पिरोते हैं,

जो जख्मे-नम किसी की देखकर रोते हैं,

लुटा देते हैं अपनी खुशी औरों पर,

कुछ ऐसे ही फरिश्ते दुनिया में होते हैं।”

ओज कवि दीपक दिवाकर ने आज़ादी की कीमत और बलिदान को याद करते हुए पढ़ा:

“चाबुकों की मार पर और बेंत के प्रहार पर,

वंदे मातरम् का जो गीत दोहराई है,

हाथों और पैरों की जो बेड़ियां रगड़कर,

क्रांति की यज्ञ वेदियां जलाई हैं।”

गीतकार सोहनलाल आज़ाद ने वर्तमान सामाजिक स्थिति को उजागर करते हुए कहा:

“हम मानव इस कलयुग के,

हम चाह के नहीं बदल पाए,

हे राम तुम्हारे पग चिन्हों पर,

अभी नहीं हम चल पाए।”

युवा कवि साहब नारायण शर्मा ने माँ के प्रति प्रेम भाव को शब्दों में ढाला:

“कर्ज माँ का किसी ने उतारा नहीं,

माँ के जैसा किसी ने दुलारा नहीं,

दौड़ आती है जो बिन बुलाए सदा,

हमने भले ही उसको पुकारा नहीं।”

व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव ‘लल्लू’ ने क्रांतिकारियों को याद करते हुए कहा:

“नमन उसे है जिस मां ने हमें जन्म दिया,

नमन उसे जिस मां का हम खाते हैं,

जिसने जन्म दिया क्रांतिकारी चंद्रशेखर,

उसी वीर भारती की गाथा हम गाते हैं।”

वरिष्ठ कवि और ठेलुहा क्लब के अध्यक्ष सियाराम रावत ने हास्य का पुट जोड़ते हुए श्रोताओं को खूब हंसाया:

“लोग कहते हैं हमको ठहाका श्री,

ठहाका लगता हूं बिल्कुल फ्री,

मैया के चरणों की रज यदि मिले,

ठहाका लगाऊं मैं चौबीस घड़ी।”

कवियित्री मानसी श्रीवास्तव ने पिता को समर्पित मार्मिक पंक्तियां पढ़ीं:

“मेरी खुशियों की खातिर वो तो दुनिया से भी लड़ते हैं,

जुबां से निकली हर ख्वाहिश को पल में पूरा करते हैं,

कांधे पर बिठाकर पापा ने दुनिया दिखाई है,

वही अभिमान हैं मेरे, हम उन पर नाज़ करते हैं।”

राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वालों को मिला सम्मान

अध्यक्षीय भाषण में डॉ. ओ. पी. वर्मा ‘ओम’ ने कहा कि अगर हम आज के सच्चे नायकों जैसे देश की सेवा में लगे सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान करें, तो वही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने ओजस्वी कविता के माध्यम से कहा:

“आओ शत-शत नमन करें हम उस महा बलिदानी को,

नहीं भूलेगा देश हमारा, शेखर की कुर्बानी को।”

कार्यक्रम में कानून की पढ़ाई के लिए चयनित और स्नातक परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण मेधावी छात्रा मानसी श्रीवास्तव को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियां

के. पी. सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य, योगेंद्र नाथ वर्मा, पूर्व बैंक कैशियर, रवि वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, बृजलाल, आलोक श्रीवास्तव, रोहित अग्रहरि सहित अनेक गणमान्य नागरिक और श्रोता उपस्थित रहे। कार्यक्रम देशभक्ति, काव्य और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम रहा, जिसने शहीदों की स्मृति को एक नई ऊर्जा दी।

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