सावन मास में इस प्रकार शिवलिंग उपासना से होती है नवग्रहों के रोगों एवं कष्टों की शन्ति


लखनऊ फोकस न्यूज
लखनऊ। जन्मकुण्डली में ग्रहों के खराब प्रभाव से होने वाले रोगों एवं कष्टों को हम शिव उपासना से अनुकूल कर सकते है। अगर कुण्डली में सूर्य ग्रह खराब है तो नेत्र रोग , ह्नदय रोग, सिर दर्द से आराम के लिए शिवलिंग पर आक के पुष्प-पत्ते एवं बिल्व पत्रों से पूजन करना चाहिए।
स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल से मिली जानकारी के अनुसार चन्द्र ग्रह से मानसिक रोग, अवसाद, खाँसी, जुकाम आदि से आराम के लिए तिल मिश्रित दूध से अभिषेक करना चाहिए।
मंगल ग्रह की खराबी से उच्च रक्तचाप संबधी , मांसपेशियों में पीड़ा से आराम के लिए शिवलिंग पर गिलोय जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करना चाहिए।
बुध ग्रह की खराबी से चर्म रोग, स्मरण शक्ति कमजोर और बुद्धि विकार होते है। इससे आराम के लिए शिवलिंग पर विधारा जड़ी-बूटी के रस से शिवलिंग पर अभिषेक करें।
गुरू ग्रह की खराबी से चर्बीं, आंते , लीवर की खराबी होती है। इसके लिए केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें ।
शुक्र ग्रह की खराबी से वीर्य कमजोर , मधुमेह, यौन रोग, नपुंसकता आदि से आराम के लिए पंचामृत ( दूध दही घी शहद शकर) से अभिषेक करें।
शनि ग्रह की खराबी से जोड़ों का दर्द, वायु विकार हडडियों के दर्द आदि से आराम के लिए गन्ने का रस/ छाछ से अभिषेक करें।
राहु- केतु की पीड़ा से सिर चकराना, मानसिक परेशानी , पिंडलियों व कमर में दर्द, बवासीर , फोड़े फुंसी , उदर पीड़ा, निम्न रक्त चाप से आराम के लिए भांग धतूरे से शिवलिंग पर अभिषेक करें।




