वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, जल्द बन सकता है दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आर्थिक शक्ति

Lucknow Focus News Desk: पिछले कुछ महीनों में दुनिया ने वैश्विक व्यापार तनाव, ट्रंप टैरिफ जैसे मुद्दों और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को करीब से देखा है। इन घटनाओं ने न केवल अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उथल-पुथल मचाई है, बल्कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर मंदी के खतरे भी मंडराए। इसके बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी गति बनाए हुए है और 2025 में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बेहद करीब है। यह संकेत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताज़ा ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ रिपोर्ट में दिया गया है।
आरबीआई की रिपोर्ट में भारत की रफ्तार
आरबीआई की अप्रैल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश का औद्योगिक और सेवा क्षेत्र अभी भी तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। जबकि दुनिया भर में उपभोक्ता भावनाओं में गिरावट, नीतिगत अस्थिरता और ट्रेड वॉर जैसी समस्याएं दिखाई दे रही हैं, भारत ने इन वैश्विक दबावों के बीच आर्थिक स्थिरता और लचीलापन बरकरार रखा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत न केवल इन बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है, बल्कि उभरते अवसरों का लाभ उठाने की स्थिति में भी है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन बन सकता है।
IMF का अनुमान: भारत बनेगा चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2025 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भारत इसी साल जापान को पीछे छोड़ सकता है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। IMF का अनुमान है कि भारत की नॉमिनल GDP वर्ष 2025-26 में 4.18 ट्रिलियन डॉलर हो सकती है, जबकि जापान की GDP इसी अवधि में 4.18 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी कम रहने की संभावना है।
मुद्रास्फीति पर राहत और बेहतर ग्रामीण खपत की उम्मीद
RBI की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि महंगाई दर नियंत्रण में है और आने वाले समय में यह लक्ष्य के आसपास बनी रह सकती है। अच्छी रबी फसल और सामान्य से बेहतर मानसून की संभावना से ग्रामीण क्षेत्रों में खपत बढ़ने की उम्मीद है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और राहत मिल सकती है।
वैश्विक टैरिफ नीति में बदलाव से शेयर बाजार में सुधार
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित टैरिफ नीतियों के बाद वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट देखी गई थी। लेकिन अब अमेरिका द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ पर अस्थायी रोक लगाने के चलते अप्रैल के मध्य तक वित्तीय बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इससे निवेशकों का विश्वास लौटा है और भारतीय बाजारों में भी सुधार के संकेत मिले हैं।




