इंदौर जल त्रासदी: नलों से टपका ‘जहर’, अब तक 15 की मौत; मासूमों और बुजुर्गों की जान पर भारी पड़ी विभाग की लापरवाही

Lucknow Focus News Desk: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का भागीरथपुरा क्षेत्र इस समय एक भीषण मानवीय त्रासदी का केंद्र बन गया है। नगर निगम द्वारा की गई दूषित पानी की सप्लाई ने अब तक 15 लोगों की जान ले ली है, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। मेडिकल रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि नलों से आने वाला पानी ‘जहरीला’ था और उसमें खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद थे।
उजड़ गए परिवार: मां की मौत, बेटा अस्पताल में
जहरीले पानी ने हंसते-खेलते परिवारों को मातम में डुबो दिया है। 10 साल के इंतजार के बाद पैदा हुए नन्हे अव्यान की मौत ने सबको झकझोर दिया। पिता सुनील ने बताया कि पैकेट के दूध को पतला करने के लिए उसमें नल का पानी मिलाया था, उन्हें नहीं पता था कि वही पानी काल बन जाएगा।
संजय की मां की मौत हो चुकी है और उनका बेटा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। इसी परिवार ने जिम्मेदारी तय न होने के विरोध में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सहायता राशि का चेक लेने से इनकार कर दिया।
जांच रिपोर्ट: पानी में मिले जानलेवा बैक्टीरिया
निगमायुक्त दिलीप कुमार यादव ने स्वीकार किया कि पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार पानी पूरी तरह दूषित और पीने के अयोग्य था। पानी में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं जिनसे हैजा (Cholera) फैलने का खतरा है। स्वास्थ्य विभाग अब पूरे इलाके में हैजा की आशंका को देखते हुए युद्धस्तर पर जांच कर रहा है।
“अधिकारी की गलती हमारी जिम्मेदारी”
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए खुद को भी जिम्मेदार माना है। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्षद ने निगमायुक्त को गंदे पानी की लिखित शिकायत की थी, जिसे उन्होंने भी आगे भेजा था, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “अगर हमारे अधिकारी की गलती है, तो उसे हम अपनी जिम्मेदारी मानेंगे।”
त्रासदी का घटनाक्रम (कब क्या हुआ)
25 दिसंबर: पहली बार डायरिया के मरीज अस्पतालों में भर्ती होना शुरू हुए।
29 दिसंबर: मौत का सिलसिला शुरू हुआ, शाम तक 4 लोगों ने दम तोड़ा।
30 दिसंबर: मौतों का आंकड़ा 14 तक पहुँचा। खुलासा हुआ कि पिछले 4 दिनों से मौतें हो रही थीं।
02 जनवरी: गीताबाई (68 वर्ष) की मौत के साथ कुल मौतों का आंकड़ा 15 पहुँचा।