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पत्रकारिता के पुरोधा: कोटमराजू रामा राव, जिन्होंने 25 से अधिक अख़बारों का किया संपादन और लड़ा आज़ादी का संग्राम

Lucknow Focus News Desk: भारतीय पत्रकारिता, स्वतंत्रता आंदोलन और स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ने वाले प्रख्यात संपादक, स्वाधीनता-सेनानी और प्रथम राज्यसभा सदस्य (1952) कोटमराजू रामा राव की जीवनगाथा प्रेरणास्पद है। रामा राव अपने दौर के अकेले ऐसे पत्रकार थे, जिन्होंने अविभाजित भारत के लाहौर से लेकर कराची, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, नई दिल्ली, इलाहाबाद और पटना तक फैले 25 से अधिक समाचार-पत्रों में सक्रिय रूप से कार्य किया।

द ‘नेशनल हेरल्ड’ और ऐतिहासिक ख्याति
रामा राव को ऐतिहासिक ख्याति तब मिली जब उन्होंने लखनऊ में पंडित जवाहरलाल नेहरू के दैनिक ‘दि नेशनल हेरल्ड’ (1938-1946) का संपादन किया।

उनका विस्तृत अनुभव क्षेत्र इतना व्यापक था कि उनके एक साथी ने टिप्पणी की थी: “वे अपने एक जेब में संपादकीय की प्रति और दूसरे में त्यागपत्र रखते थे।”
उनके द्वारा कार्य किए गए प्रमुख समाचार-पत्रों में शामिल हैं:

  • दि सिंध ऑब्जर्वर (कराची, 1921)
  • दि टाइम्स ऑफ इंडिया (मुंबई, 1924)
  • दि पीपल (लाहौर, 1936)
  • दि हिन्दुस्तान टाइम्स (नई दिल्ली, 1938)
  • दि लीडर (इलाहाबाद, 1920)

स्वतंत्रता संग्राम और जेल की सज़ा

1942 से 1945 तक महात्मा गांधी के सान्निध्य में रहते हुए, रामा राव ने राष्ट्रीय आंदोलनों की विशेष रिपोर्टिंग की। 1942 में, ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें ‘जेल या जंगल’ शीर्षक से ‘दि नेशनल हेरल्ड’ में एक संपादकीय लिखने पर छह माह के कारावास और जुर्माने की सज़ा दी थी। इस संपादकीय में उन्होंने लखनऊ कैंप जेल में कांग्रेसी सत्याग्रहियों पर हुए बर्बर अत्याचार की कड़ी निंदा की थी।

उन्हें क्रांतिकारी वार्ड में नज़रबंद रखा गया, जहां उनके साथ शिव वर्मा, जयदेव कपूर, जोगेश चटर्जी जैसे स्वतंत्रता सेनानी भी कैद थे। उन्होंने शाम लाल, एच. वाई. शारदा प्रसाद (इंदिरा गांधी के मीडिया सलाहकार), एम. चलपति राव और बालकृष्ण मेनन (बाद में स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती) जैसे कई युवा पत्रकारों को प्रशिक्षित किया।

संवैधानिक भूमिकाएं और योगदान

प्रथम राज्यसभा सदस्य: 1952 में, अविभाजित मद्रास राज्य (आंध्र प्रान्त) से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित होकर प्रथम राज्यसभा (संसद) के सदस्य बने।

सरकारी सलाहकार: 1956 में, भारत सरकार के प्रथम सलाहकार के नाते उन्होंने पंचवर्षीय योजना के प्रचार-प्रसार का संचालन किया।

पत्रकार संगठनों के संस्थापक: वह अखिल भारतीय समाचारपत्र संपादक सम्मेलन (AINEC, 1940) के संस्थापकों में से एक थे और भारतीय श्रमजीवी पत्रकार फेडरेशन (IFWJ, 1950) के उपाध्यक्ष के रूप में इसके संविधान की रचना की।

भाषाई राज्य: प्रथम भाषाई-राज्य आंध्र के निर्माण हेतु जनांदोलन में सक्रिय रहे।

स्मृति और लेखन

आत्मकथा: उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘दि पैन एज माई स्वोर्ड’ (The Pen As My Sword) लिखी।
डाक टिकट: भारत सरकार ने 9 नवंबर 1997 को उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर उनकी स्मृति में एक डाक टिकट और लिफाफा जारी किया था।

9 नवंबर 1896 को चीराला (आंध्र प्रदेश) में जन्मे रामा राव ने मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और 1922 में अंग्रेजी कवियित्री सरसवाणी से विवाह किया था।

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