भारत में कम उम्र की महिलाओं में बढ़ रहा सर्वाइकल कैंसर, जानें कारण और बचाव के तरीके

Lucknow Focus News Desk: भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले अब सिर्फ बुजुर्ग महिलाओं तक ही सीमित नहीं रह गए हैं। हाल के वर्षों में कम उम्र की महिलाओं, खासकर 30 से 40 साल के बीच की महिलाओं, में भी इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है, जिसके पीछे कुछ प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
डॉक्टरों के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर महिला के सर्विक्स में तब होता है जब कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ने लगती हैं। इसके बढ़ते मामलों की कुछ मुख्य वजहें ये हैं:
पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर का शुरुआती पता लगाने में मदद करता है। लेकिन, जागरूकता की कमी और मेडिकल सुविधाओं तक सीमित पहुँच के कारण बहुत कम महिलाएं यह टेस्ट कराती हैं।
यह एक यौन संचारित वायरस है, जो असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है। अगर यह वायरस लंबे समय तक शरीर में रहता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) कमजोर होती है, तो यह सर्वाइकल कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और कैंसर का कारण बन सकता है।
शुरुआती लक्षण और बचाव
कई बार सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को महिलाएं सामान्य थकावट या बढ़ती उम्र का संकेत मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। इन लक्षणों में लगातार थकान, पीठ या पेल्विक में दर्द, सेक्स के बाद ब्लीडिंग या असामान्य डिस्चार्ज शामिल हैं। अगर ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- टीकाकरण: एचपीवी वैक्सीन लगवाएं।
- सुरक्षित जीवनशैली: असुरक्षित यौन संबंध से बचें और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
- स्वस्थ खान-पान: हेल्दी और पौष्टिक खाना खाएं।
- नियमित जांच: पैप स्मीयर टेस्ट जैसी नियमित जांच कराएं।




